तिब्बत में टला नहीं जल प्रलय का खतरा
तिब्बत के गियिरोंग काउंटी में भीषण बाढ़ के बाद हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। अगले तीन दिनों में बारिश की आशंका के बीच भूस्खलन, मडस्लाइड और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सीमा के नेपाली हिस्से में भी भारी तबाही हुई है। बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं, जबकि खराब मौसम अभियान मुश्किल बना रहा है।
- तिब्बत: गियिरोंग काउंटी में बाढ़ और मडस्लाइड का खतरा बरकरार।
- नेपाल: भीषण जल आपदा में बड़ी संख्या में लोग लापता।
- गियिरोंग पोर्ट: 141 बचावकर्मियों का पहला दल आपदा क्षेत्र में पहुंचा।
Tibet Flood Threat Remains High : चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में बाढ़ के बाद हालात अब भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। शिगात्से प्रिफेक्चर की गियिरोंग काउंटी में अगले तीन दिनों तक बारिश का अनुमान है। ऐसे में भूस्खलन, मडस्लाइड और अचानक बाढ़ का खतरा कम नहीं हुआ है।
सबसे बड़ी चिंता उन जगहों को लेकर है जहां मलबे और मिट्टी के कारण अस्थायी जल अवरोध बन रहे हैं। ड्रोन से सामने आई तस्वीरों में भूस्खलन वाले इलाके में एक बड़ी झील दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि गियिरोंग पोर्ट के नजदीक बनी यह झील सीमा के नेपाली हिस्से में है और लगातार फैल रही है।
सरकारी प्रसारणकर्ता सीसीटीवी के अनुसार, झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा है और इसका पानी बाहर निकलना शुरू हो गया है। अनुमान है कि अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है। ऐसे में इसके टूटने पर बड़े पैमाने पर जल प्रलय की आशंका जताई जा रही है।
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अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के विश्लेषण ने इस आपदा की वजह को लेकर भी अहम जानकारी दी है। सीएनएन और शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में जमीन के तेज कंपन को 4.4 तीव्रता के भूकंप के रूप में दर्ज किया गया था। बाद में भूकंपीय आंकड़ों और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिला कि यह भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर के ढहने और उसके साथ मलबे के बड़े पैमाने पर खिसकने की घटना थी।
इस आपदा का असर नेपाल तक भी पहुंचा है। तिब्बत से आए विनाशकारी जल प्रवाह ने नेपाल में जान-माल को भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक प्रभावित क्षेत्र में लापता हैं। नेपाल ने बताया है कि लापता विदेशी नागरिकों में भारत, अमेरिका, यूक्रेन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा के नागरिक शामिल हैं। इनमें कई लोग ट्रैकिंग या धार्मिक यात्रा पर गए थे।
चीन ने भी गियिरोंग काउंटी में 550 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गियिरोंग बॉर्डर पोर्ट राहत और बचाव अभियान का प्रमुख केंद्र बन गया है। खराब मौसम और रास्ते बंद होने के कारण बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में करीब 22 घंटे लग गए।
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सीसीटीवी के मुताबिक, पोर्ट से लगभग 2.5 किलोमीटर पहले ही सड़क पर करीब डेढ़ मीटर मोटी कीचड़ और मलबे की परत जमा है। गुरुवार सुबह करीब आठ बजे 141 बचावकर्मियों का पहला दल गियिरोंग पोर्ट पहुंचा। ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ान भरने में सक्षम एमआई-171 हेलीकॉप्टर को भी अभियान में लगाया गया है।
हालांकि राहत कार्यों के सामने मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गियिरोंग काउंटी के एक अधिकारी के अनुसार, इलाके में दूरसंचार व्यवस्था अब भी बाधित है। स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और पहले पहुंची कुछ बचाव टीमों से संपर्क स्थापित करने में परेशानी हो रही है।



