ट्रंप का बड़ा दावा, तेल उत्पादन में अमेरिका नंबर-1
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बन गया है। टेक्सास के डलास में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में वेनेजुएला के तेल भंडार को शामिल नहीं किया गया है। इसी दौरान ट्रंप ने नए ऊर्जा समझौते को अमेरिकी इतिहास के बड़े सौदों में से एक बताया।
- ट्रंप का दावा: अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक बना।
- वेनेजुएला के तेल भंडार को अमेरिकी उत्पादन के दावे में शामिल नहीं किया गया।
- अमेरिका-वेनेजुएला ऊर्जा समझौते से 25 वर्षों में करीब 200 अरब डॉलर की आय का अनुमान।
Trump Claims US Is Now World’s Top Oil Producer : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की ऊर्जा ताकत को लेकर बड़ा दावा किया है। टेक्सास के डलास में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका अब दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। ट्रंप ने खास तौर पर कहा कि इस गणना में वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार को अभी शामिल नहीं किया गया है।
ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ हुए नए ऊर्जा समझौते का जिक्र करते हुए इसे अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पहले ही उत्पादन के मामले में शीर्ष पर पहुंच चुका है और वेनेजुएला के संसाधन इसमें अलग से जुड़ेंगे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेजुएला के करीब 65 अरब बैरल प्रमाणित तेल भंडार का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस समझौते के बाद अमेरिका की ऊर्जा क्षमता को और मजबूती मिल सकती है। व्हाइट हाउस इसे वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने और देश के पुनर्निर्माण की व्यापक योजना से जोड़ रहा है।
समझौते की शर्तों के अनुसार, नॉर्थ अमेरिकन ब्लू एनर्जी पार्टनर्स (NABEP) अपनी मूल कंपनी में 35 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी पेंटागन के ऑफिस ऑफ स्ट्रैटेजिक कैपिटल को बिना किसी भुगतान के देगा। इसके साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग को उत्पादित तेल का 20 प्रतिशत हिस्सा लागत मूल्य पर खरीदने का अधिकार मिलेगा।
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व्हाइट हाउस का कहना है कि NABEP को वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों के लिए 100 साल की रियायतें मिली हैं। हालांकि, इस अवधि को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर सामने आया है। वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज इससे पहले इस समझौते को 25 साल का करार बता चुकी हैं।
रियायत की अवधि को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग बयानों ने समझौते की वास्तविक शर्तों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद अमेरिकी प्रशासन इस करार को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम बता रहा है।



