ट्रंप का बड़ा AI ऐलान, नाम बदलने की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आधिकारिक तौर पर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ नाम देने की योजना बताई है। टेक कंपनियों के साथ बैठक में उन्होंने इंडस्ट्री के सेल्फ-रेगुलेशन का समर्थन किया और चीन के मुकाबले अमेरिकी तकनीकी बढ़त बनाए रखने पर जोर दिया। डेटा सेंटर वाले समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए कंपनियों के सहयोग की बात भी कही।

  • 🤖 AI का नाम: ट्रंप ने ‘सुपर इंटेलिजेंस’ नाम का प्रस्ताव रखा।
  • 🇺🇸 अमेरिकी बढ़त: चीन के मुकाबले तकनीकी नेतृत्व बनाए रखने पर जोर।
  • 🏢 सेल्फ-रेगुलेशन: टेक इंडस्ट्री के खुद नियम बनाने का समर्थन।

Trump Proposes Renaming AI as ‘Super Intelligence’: वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव सामने रखा है। टेक्नोलॉजी कंपनियों के नेताओं के साथ बैठक और लंच के दौरान ट्रंप ने कहा कि AI का आधिकारिक नाम बदलकर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बदलाव से जुड़ा एक दस्तावेज भी जारी किया जाएगा।

ट्रंप के मुताबिक, ‘आर्टिफिशियल’ शब्द इस तकनीक की प्रकृति को पूरी तरह व्यक्त नहीं करता। उन्होंने कहा कि यह तकनीक सामान्य अर्थों में कहीं अधिक इंटेलिजेंस उपलब्ध कराती है और प्रशासन इसके लिए ‘SI’ शॉर्ट-फॉर्म का इस्तेमाल करेगा।

नाम बदलने के प्रस्ताव को ट्रंप ने अमेरिका की तकनीकी बढ़त से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अमेरिका चीन समेत अन्य देशों से आगे है और वह इस स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने AI को लेकर चीन के साथ सहयोग में भी सावधानी बरतने की बात कही।

ट्रंप ने विशेष रूप से ऐसे जॉइंट वेंचर को लेकर चिंता जताई, जिसमें अमेरिकी कंपनियां चीन के साथ मिलकर काम करें। उनके अनुसार, इस तरह के सहयोग में अमेरिकी तकनीक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा होने का जोखिम हो सकता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इस तकनीक को लेकर बातचीत की है, लेकिन इसे सीमित रखने की कोशिश की गई है।

रेगुलेशन के सवाल पर ट्रंप ने AI इंडस्ट्री के सेल्फ-रेगुलेशन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों के साथ इंडस्ट्री को अपने स्तर पर भी जिम्मेदार तरीके से काम करना चाहिए। गलत गतिविधियों की स्थिति में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और एफबीआई जैसी सरकारी एजेंसियों के हस्तक्षेप का भी उन्होंने उल्लेख किया।

हालांकि, ट्रंप की टिप्पणियों में सेल्फ-रेगुलेशन के लिए कोई विस्तृत नया ढांचा या खास नियम सामने नहीं रखा गया। उन्होंने यह जरूर कहा कि टेक्नोलॉजी कंपनियों से ईमानदारी और भरोसेमंद तरीके से काम करने की उम्मीद है।

बैठक में AI डेटा सेंटर को लेकर स्थानीय समुदायों का मुद्दा भी उठा। ट्रंप ने कहा कि टेक कंपनियां उन इलाकों के साथ ज्यादा करीब से काम करने को तैयार हैं, जहां उनके डेटा सेंटर स्थापित हैं। इसमें ऊर्जा की उपलब्धता, शिक्षा और शिक्षकों समेत स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक सहायता जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल हो सकता है।

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ट्रंप ने दावा किया कि डेटा सेंटर वाले कुछ समुदायों को इससे आर्थिक फायदा हुआ है और वहां टैक्स का बोझ भी कम हुआ है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई आंकड़ा या किसी विशेष समुदाय का उदाहरण पेश नहीं किया।

उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियां चाहती हैं कि डेटा सेंटर वाले इलाके सुरक्षित और समृद्ध रहें। उनके मुताबिक, अगर किसी प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिलता है तो कंपनियां उसे अमेरिका के किसी दूसरे हिस्से या विदेश में ले जाने पर विचार कर सकती हैं।

बैठक के दौरान शुरुआती सार्वजनिक प्रस्ताव यानी IPO और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठाए गए। ट्रंप ने कहा कि बैठक से संबंधित जानकारी एक आधिकारिक बयान में जारी की जाएगी, हालांकि उन्होंने अपने जवाब में IPO के मुद्दे पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

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