हिंद महासागर पर अमेरिका की नई रणनीति, भरोसेमंद साझेदारों संग बढ़ेगा पोर्ट नेटवर्क
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका हिंद महासागर क्षेत्र में विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ रणनीतिक बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य समुद्री नेटवर्क को सुरक्षित, मजबूत और किसी भी तरह की रणनीतिक निर्भरता से मुक्त बनाना है।
- हिंद महासागर में रणनीतिक पोर्ट अवसंरचना विकसित करने पर अमेरिका का जोर।
- अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बताया अहम।
- भारत और साझेदार देशों के साथ समुद्री सुरक्षा व रक्षा सहयोग बढ़ाने पर फोकस।
US Eyes Strategic Port Network in Indian Ocean: नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में अमेरिका ने भरोसेमंद देशों के साथ बंदरगाह अवसंरचना विकसित करने की योजना पर जोर दिया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि इस पहल का मकसद समुद्री नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, मजबूत और किसी भी रणनीतिक निर्भरता से मुक्त बनाना है।
राजदूत गोर ने यह बात डैनियल के. इनौये एशिया-पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज (एपीसीएसएस) के नेतृत्व, पूर्व छात्रों और विभिन्न सरकारी अधिकारियों के साथ हुई बैठक के दौरान कही। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, साझेदारी और जिम्मेदारियों के बेहतर समन्वय पर अपने विचार साझा किए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गोर ने लिखा कि एपीसीएसएस में अपने विचार रखने का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ मिलकर रणनीतिक बंदरगाहों का विकास किया जा रहा है, ताकि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग लंबे समय तक सुरक्षित और विश्वसनीय बने रहें।
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राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ क्षेत्रीय साझेदारी को और मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार, समुद्री सुरक्षा और साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
एक अन्य पोस्ट में सर्जियो गोर ने अमेरिकी पैसिफिक कमांड के दौरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने एडमिरल पापारो का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें यूएसएस वरमोंट, सी-17 ग्लोबमास्टर-III, एफ-22 रैप्टर और ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर जैसे प्रमुख सैन्य प्लेटफॉर्म को करीब से देखने का अवसर मिला। उन्होंने सैन्य कर्मियों की तैयारी और समर्पण की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक अनुभव बताया।
गोर ने यह भी जानकारी दी कि पैसिफिक कमांड के दौरे के दौरान उनकी क्षेत्रीय कमांडरों के साथ रक्षा सहयोग, समुद्री निगरानी और संयुक्त सैन्य तैयारियों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के साथ मिलकर हाई-एंड डिफेंस कोऑपरेशन और मैरीटाइम अवेयरनेस को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
गौरतलब है कि डैनियल के. इनौये एशिया-पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज (एपीसीएसएस) अमेरिकी रक्षा विभाग का प्रमुख संस्थान है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा, प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के जरिए विभिन्न देशों के नागरिक एवं सैन्य नेतृत्व के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।



