होर्मुज पर अमेरिकी हमला, ईरान का पलटवार
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास लराक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जबकि जॉर्डन ने आठ मिसाइलों को रोकने का दावा किया। बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज में जहाजों की आवाजाही, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार पर नए संकट की आशंका बढ़ गई है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य: लराक द्वीप पर अमेरिकी बमबारी के बाद तनाव बढ़ा।
- ईरान का हमला: जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे गए।
- तेल की कीमतें: नए सैन्य टकराव के बाद कच्चे तेल के दाम चढ़े।
US-Iran Tensions Rise Over Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिका ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में स्थित ईरान के लराक द्वीप पर हमला किया। इसके कुछ ही समय बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरान ने अपने हमले में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया। आईआरजीसी के मुताबिक, हमलों में अमेरिकी सैन्य ढांचे, तकनीकी और मरम्मत सुविधाओं तथा लड़ाकू विमानों की तैनाती से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
जॉर्डन की ओर से कहा गया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने सोमवार तड़के देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
लराक द्वीप क्यों बना निशाना?
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, लराक द्वीप पर मौजूद ऐसे लॉन्चरों को निशाना बनाया गया था, जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्र में रॉकेट दागे जाने की तैयारी थी।
दूसरी ओर, ईरान की फार्स समाचार एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिकी हमले में कई ईरानी सैनिक मारे गए और घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
होर्मुज को लेकर बढ़ा विवाद
होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का अहम केंद्र बना हुआ है। वाशिंगटन का कहना है कि अमेरिकी सैन्य सुरक्षा के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल गुजर रहा है, जबकि तेहरान का रुख है कि जलडमरूमध्य बंद है।



