रूस प्रतिबंध बिल पर अमेरिका में वोटिंग, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा?

अमेरिका में रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंध विधेयक पर प्रतिनिधि सभा में अंतिम मतदान की तैयारी है। बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। भारत भी प्रस्ताव में शामिल देशों में है, लेकिन शुल्क लगना अभी तय नहीं है।

  • रूस प्रतिबंध बिल: अमेरिकी हाउस में अंतिम वोट की तैयारी
  • भारत पर 100% टैरिफ: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई का प्रस्ताव
  • ट्रंप को अधिकार: राष्ट्रपति को 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति मिल सकती है

US Russia Sanctions Bill: 100% Tariff Risk for India: वॉशिंगटन। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने से जुड़ा एक अहम विधेयक अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अंतिम मतदान की ओर बढ़ गया है। Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम के इस बिल को सीनेट अगस्त में 86-11 के वोट से पारित कर चुकी है।हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 15 सितंबर को 214-211 के अंतर से एक प्रक्रियात्मक वोट पास किया, जिससे बिल पर आगे बहस और अंतिम मतदान का रास्ता साफ हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अंतिम वोट गुरुवार को प्रस्तावित है।

ट्रंप को मिल सकती है 100% टैरिफ लगाने की शक्ति

प्रस्तावित कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। यह व्यवस्था उन देशों को भी प्रभावित कर सकती है जिन्हें रूस से जुड़े प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करने वाली श्रेणी में रखा जाए। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बिल पास होते ही भारत पर सीधे 100 प्रतिशत शुल्क लागू हो जाएगा। कानून बनने के बाद भी टैरिफ लगाने का फैसला राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में रहेगा।

भारत समेत कई देशों के नाम प्रस्ताव में

हाउस रूल्स कमेटी के दस्तावेज में एक संशोधन के तहत भारत के साथ चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य के नाम भी सूचीबद्ध किए गए हैं। इसलिए शुरुआती रिपोर्टों में बताए गए “भारत समेत चार देश” के बजाय मौजूदा हाउस दस्तावेज में कुल 10 देशों के नाम दिखाई देते हैं। इन देशों को रूसी मूल के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खरीद अथवा प्रतिबंधों से बचने में मदद जैसी शर्तों के संदर्भ में टैरिफ के लिए पात्र बताया गया है।

सीनेट से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त 2026 को 86-11 के वोट से मंजूरी दी थी। इसमें रूस से जुड़े अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई के साथ-साथ ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने के प्रावधान भी हैं।अब हाउस की मंजूरी इसके अगले महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक है। अगर प्रतिनिधि सभा भी सीनेट से पारित विधेयक को मंजूरी देती है, तो इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की प्रक्रिया होगी।

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भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?

भारत लंबे समय से रूस से कच्चे तेल की खरीद करता रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका इस कानून के तहत भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला करता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया ही जाएगा, क्योंकि कानून में राष्ट्रपति को अधिकार मिलने और उस अधिकार के इस्तेमाल के बीच अंतर है। इसलिए अभी सबसे अहम घटनाक्रम हाउस का अंतिम मतदान और उसके बाद कानून की आगे की प्रक्रिया है। मौजूदा स्थिति में 100% टैरिफ भारत पर लगा हुआ शुल्क नहीं, बल्कि प्रस्तावित कानून के तहत संभावित कार्रवाई की अधिकतम सीमा है।

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