जलवायु परिवर्तन से बदला टिड्डियों का व्यवहार, किसानों पर आफत

जयपुर। जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर खेती और किसान पर पड़ रहा है। ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन ने जहां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है वहीं खेती और किसान के सामने चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। जलवायु परिवर्तन से जीव जंतुओं का व्यवहार बदल रहा है। पश्चिमी राजस्थान में भरी सर्दियों में भी टिड्डी के प्रकोप को जलवायु परिवर्तन का ही कारण माना जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के चलते टिड्डियों का व्यवहार बदल रहा है, आम तौर पर अक्टूबर—नवबंर के बाद टिड्डी नहीं आती थी लेकिन अब कड़ाके की ठंड में भी टिड्डी आ रही है। टिड्डियों के इस बदलते व्यवहार का कृषि वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे।

दुर्गापुरा कृषि अनुसंधान केंद्र में जलवायु परिवर्तन से खेती के सामने आ रही चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए आठ राज्यों के कृषि वैज्ञानिक जुटे हैं, शुक्रवार से शुरु हुई इन वैज्ञानिकों की ट्रैनिंग 21 दिनों तक चलेगी। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक टिड्डी प्रभावित इलाकों का दौरा कर अनसंधान के प्रूफ जुटाएंगे, वहीं अत्यधिक पाला पडऩे से खराब हुई फसलों का भी अध्ययन करेंगे। जलवायु परिवर्तन से खेती पर कई तरह के दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं। आने वाले दिनो ंमें इसके नतीजे औरी भयावह रूप से सामने आ सकते हैं। वैज्ञानिक इन्हीं का तोड़ निकालने में जुटे हैं। जोबनेर कृषि यूनिवर्सिटी के कुलपति जेएस संधू ने कहा, जलवायु परिवर्तन का खेती पर असर पड़ रह है, कृषि वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटेंगे।

पश्चिमी राजस्थान के जिलों में फिर मंडराया टिड्डी का खतरा
पाकिस्तान से सटे जिलों में फिर टिड्डी का खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान के सीमावर्ती जि़लों में बड़ा टिड्डी दल देखा गया है, यह टिड्डी दल करीब 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अभी पााकिस्तान में है। यह टिड्डी दल हवा के साथ कभी भी पश्चिमी जिलों में आ सकता है। कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के मुताबिक पाकिस्तान में बड़ा टिड्डी दल देखा गया है,इसके खतरे से निपटने के लिए टीमों को सतर्क कर दिया है, कृषि आयुक्त को बॉर्डर एरिया में भेजा गया है।