माघ महोत्सव के तहत हुए संस्कृत अन्त्याक्षरी और चिकित्सा एवं ज्योतिष पर परिचर्चा के आयोजन

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संस्कृति अन्त्याक्षरी में 19 छात्र छात्रओं ने किया एक से बढ़कर एक श्लोकों का धारावाहिक उच्चारण

परिचर्चा में संस्कृत विद्वावन प्रो. रामपाल शर्मा और प्रो. श्याम देव मिश्र ने व्यक्त किए विचार

जयपुर। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित किए जा रहे एक महीने के माघ महोत्सव के तहत शनिवार को संस्कृत अन्त्याक्षरी और चिकित्सा एवं ज्योतिष विषय पर परिचर्चा के आयोजन हुए। जगद्गुरू राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित ‘चिकित्सा एवं ज्योतिष’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में संस्कृत विद्वान प्रो. रामपाल शर्मा और प्रो. श्याम देव मिश्र से प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने संवाद किया। परिचर्चा में विद्वानों ने ज्योतिष और चिकित्सा के अर्न्तसम्बन्धों की व्याख्यता करते हुए कहा कि ज्योतिष एवं चिकित्सा ज्योतिष शास्त्र भविष्य दर्शन की आध्यात्मिक विद्या है।

भारत में चिकित्सा शास्त्र (आयुर्वेद) का ज्योतिष से बहुत गहरा संबंध है। जन्मकुण्डली में व्यक्ति के जन्म के समय ब्रह्माण्ड में स्थित ग्रह नक्षत्रों का मानचित्र होता है, जिसका अध्ययन कर जन्म के समय ही यह बताया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति को उसके जीवन में कौन-कौन से रोग होंगे। विद्वानों ने परिचर्चा में रोग क्या है और रोग की परिभाषा पर चर्चा करते हुए कहा कि व्यक्ति के शरीर में वात, पित्त और कफ का समान अनुपात में रहना अनिवार्य है इनका अनुपात बिगड़ते ही रोगों की उत्पत्ति होने लगती है।

आयोजित हुई संस्कृत अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता

इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में संस्कृत अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता का हाई-ब्रिड मोड पर आयोजन किया गया। इसमें राजस्थान के विभिन्न शहरों से आए कुल 19 छात्र-छात्राओं ने अन्त्याक्षरी के अनुरूप श्लोक के आखरी शब्द से एक के बाद एक श्लोकों का उच्चारण करते हुए इस विधा पर अपनी मजबूत पकड़ का अहसास करवाया।  प्रतियोगिता में जसवन्तगढ़ महाविद्यालय के  बालचन्द्र तिवारी ने प्रथम, राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के मृत्यंजय तिवारी ने द्वितीय तथा संजय शिक्षक प्रतिशिक्षण कॉलेज जयपुर के रमाकांत टिलावत ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।