विधानसभा में राजस्थानी को राजभाषा का दर्जा देने की फिर उठी मांग

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Pratap Khachariyawas
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विधायक बलवान पूनियां ने उठाई राजस्थानी को राजभाषा का दर्जा देने की मांग

अशोक गहलोत सरकार राजस्थानी भाषा को लेकर बहुत ही संवेदनशील है : खाचरियावास

अब तक 33 जिलों के 133 विधायकों ने लिखे मुख्यमंत्री को पत्र

जयपुर। राजस्थानी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिये जाने की मांग के बीच केबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा का इतिहास बड़ा ही गौरवशाली रहा है। अपनी मातृ भाषा मारवाड़ी में बोलते हुए खाचरियावास ने कहा कि पूरी दुनिया में राजस्थानी भाषा ने राजस्थान का गौरव बढ़ाया है। राजस्थानी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिये जाने के सवाल पर खाचारियावास ने कहा कि इस मामले जो भी मुझसे बन पड़ेगा वह जरूर करूंगा। इस मसले को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने रखूंगा। अशोक गहलोत सरकार राजस्थानी भाषा को लेकर बहुत ही संवेदनशील है। मुझे उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इसको लेकर कोई फैसला लेगी।

उधर, भादरा विधायक बलवान पूनियां ने भी मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में बोलते हुए राजस्थानी भाषा को राज्य की राजभाषा का दर्जा दिए जाने की मांग की। सदन में पूनियां ने अपनी बात राजस्थानी भाषा में ही रखी।

इस तरह बोले पूनियां

सभापति महोदय, राजस्थानी राजस्थान प्रदेस री मातृभासा है अर ईं रो संरक्षण अर संवर्धन करणो राज्य सरकार रो फरज है। आजादी पछै आ भासा राजकाज अर पढाई—लिखाई सूं बारै करीजगी। आपणी ही भासा आपणै प्रांत में ओपरी होगी। सभापति महोदय, गोआ री कोंकणी मान्यता सूं पैली राजभासा बणगी ही। झारखंड में मगही, भोजपुरी समेत 17 भासावां, छतीसगढ़ में छतीसगढ़ी, मेघालय में खासी अर गारो, सिक्किम में भूटिया अर लेपचा अर पश्चिम बंगाल में खमतपूरी अर राजबंशी इसी भासावां है जिकी बिना संवैधानिक मान्यता रै ई राजभासा बणाईजी है। ईं स्यूं आ बात सिद्ध होवै कै कोई भी राज्य आपरै राज्य री भासा रे बिना संवैधानिक मान्यता रे ई राजभाषा रो दरजो दे सकै। राजस्थान में और भासावां पढेड़ा प्रतिभागी नौकरी लागै, पण राजस्थानी पढेड़ां नै कोई मौको कोनी। ओ अन्याय है। राजस्थानी नै बेगी सूं बेगी राजभासा रो दरजो दियो जाणो चहियै। सागै ही स्कूलां अर कोलेजां में राजस्थानी विषय रो विस्तार करणो जरूरी है।

33 जिलों के 133 विधायकों ने लिखे मुख्यमंत्री को पत्र

राजस्थानी मोट्यार परिषद ने जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थानी भाषा को प्रदेश की राजभाषा का दर्जा दिए जाने की मांग अब प्रदेशव्यापी हो गई है तथा सभी 33 जिलों के 133 विधायक अब तक इस हेतु मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिख चुके हैं। शेष विधायकों से भी पत्र लिखवाने का काम जारी है। इस अभियान में राजस्थानी भाषा मोटियार परिषद् के अध्यक्ष शिवदानसिंह जोलावास, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष दीपक मेहता (जयपुर), उपाध्यक्ष जगदीश मेघवाल(जोधपुर), महावीर मुड (चुरू), मगराज मेघवाल (बाड़मेर), कानाराम सिंघल (जालोर) सहित पूरी युवा टीम पूरे जोश के साथ लगी हुई है।