‘अपनी जड़ और भाषा पर गर्व करें’, अभ्युदय-2026 में पूर्व छात्रों की सीख

भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के अभ्युदय-2026 कार्यक्रम में पूर्व विद्यार्थियों ने नवागत छात्रों को करियर और जीवन से जुड़े अनुभव बताए। लेखक दुर्गेश सिंह ने भाषा और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की बात कही। अन्य पूर्व छात्रों ने पत्रकारिता में मूल्यों, तकनीक के सही उपयोग, निरंतर सीखने और अपनी पहचान बनाने को सफलता की कुंजी बताया।

  • अभ्युदय-2026 में नवागत विद्यार्थियों को पूर्व छात्रों ने करियर मंत्र दिए।
  • दुर्गेश सिंह ने भाषा, जड़ों और अपनी पृष्ठभूमि पर गर्व करने की बात कही।
  • पूर्व विद्यार्थियों ने पत्रकारिता, एआई, मीडिया और करियर को लेकर अनुभव साझा किए।

Insights from Alumni at Abhyuday-2026 : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में नए विद्यार्थियों के स्वागत और मार्गदर्शन के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम ‘अभ्युदय-2026’ में देश-विदेश में सक्रिय पूर्व विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में मीडिया, सिनेमा, विज्ञापन, डिजिटल पत्रकारिता और तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों ने नवागत विद्यार्थियों को बदलते दौर की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी।

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वेबसीरीज ‘गुल्लक’ के लेखक और सिनेमा क्षेत्र में सक्रिय पूर्व विद्यार्थी दुर्गेश सिंह ने विद्यार्थियों से अपनी भाषा, जड़ों और पृष्ठभूमि को अपनी ताकत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके करियर में अब तक मिले अवसरों के पीछे उनकी भाषा, जमीन और पृष्ठभूमि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

दुर्गेश सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी विद्यार्थियों से बेवजह डरने के बजाय इसे एक उपयोगी टूल के रूप में अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि एआई इंसानों को बदलने के बजाय काम करने के नए तरीके उपलब्ध करा रहा है और लेखन सहित कई क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने भारतीय धार्मिक और पारंपरिक कहानियों पर बन रही फिल्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि दादी-नानी से सुनी कहानियों का अपना सांस्कृतिक महत्व है।

टीवी पत्रकार और एंकर रवि मिश्रा ने कहा कि पत्रकारिता में संसाधन जरूरी हैं, लेकिन पेशेवर मूल्यों की भूमिका उससे भी बड़ी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि विश्वविद्यालय से निकलते समय वे डिग्री के साथ कुछ मजबूत मूल्यों को भी अपने साथ लेकर जाएं।

तकनीक प्रबंधन से जुड़े पूर्व विद्यार्थी अजीत कुमार ने लगातार सीखते रहने को सफलता के लिए जरूरी बताया। डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े प्रसून मिश्रा, बिजनेस पत्रकारिता की मीनाक्षी शर्मा और राजनीतिक संचार के क्षेत्र में सक्रिय पंकज झा ने भी अपने अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पहले बैच के विद्यार्थी संजय सलिल ने ऑनलाइन जुड़कर संस्थान की यात्रा और अपने अनुभवों पर बात की। प्राग से जुड़ी पूर्व विद्यार्थी नीति सुधा ने मनोरंजन पत्रकारिता से जुड़े अनुभव साझा किए। वहीं सुधांशु शेखर ने विज्ञापन, क्रिएटिव हेड और फिल्म मेकिंग जैसे क्षेत्रों में करियर की संभावनाओं पर चर्चा की।

पूर्व विद्यार्थी ललित कुमार ने विद्यार्थियों को एआई पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल सुविधा के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन अपनी क्षमता और सोच को विकसित करना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही उन्होंने विदेशी भाषाएं सीखने पर भी जोर दिया। ओमप्रकाश रजक ने कहा कि कॉलेज के दिनों में की गई तैयारी भविष्य में सबसे बड़ी पूंजी साबित होती है।

विज्ञापन क्षेत्र में सक्रिय सुशील अग्रवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय से मिली मीडिया की समझ ने उन्हें विज्ञापन के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद की। उन्होंने अपनी विज्ञापन एजेंसी शुरू करने के अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों से संघर्ष से घबराए बिना लक्ष्य पर टिके रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश में युवाओं के लिए रोजगार और अवसरों की कमी नहीं है।

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लोकलाइजेशन इंडस्ट्री में काम कर रहीं शिखा शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय में मिली शिक्षा ने उन्हें मीडिया क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ काम करने का आधार दिया। बिजनेस पत्रकारिता से जुड़ी अपर्णा झा ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान अपनी रुचि के क्षेत्र पहचानने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पसंद के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिलने पर पेशेवर जीवन ज्यादा संतोषजनक बनता है।

वरिष्ठ पत्रकार आनंद पांडेय ने व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर ऑथेंटिसिटी और इंटीग्रिटी बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अपनी पहचान और ब्रांड बनाने के लिए कथनी और करनी में समानता जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को सुनने, समझने और उस पर विचार करने की आदत विकसित करने की सलाह दी।

पहले बैच के विद्यार्थी और वरिष्ठ पत्रकार दीपक पगारे ने विश्वविद्यालय की बढ़ती स्वीकार्यता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहां से मिला व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान उनके जीवन की मजबूत नींव बना। डिजिटल मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार सुमित पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय में लगातार सीखने की प्रक्रिया ही विद्यार्थियों को बेहतर पत्रकार बनने में मदद करती है।

सुमित पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय में समय-समय पर कुमार विश्वास और पीयूष मिश्रा जैसे रचनात्मक क्षेत्र के दिग्गजों से संवाद का अवसर मिलता है। विद्यार्थियों को ऐसे लोगों की यात्रा और अनुभवों से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा पत्रकार वही है जो समाचार तैयार करते समय पाठकों को केंद्र में रखता है।

कार्यक्रम में विदेशों से भी कई पूर्व विद्यार्थी ऑनलाइन जुड़े। 1998-2000 बैच की तारिका अमेरिका से, 2002-2004 बैच के विनोद नागर दुबई से, 2011-2013 बैच के सुमित रंजन प्राग से, 2013-2017 बैच के आशीष सिंह मिस्र से और मंतोष सिंह दुबई से ऑनलाइन शामिल हुए और नवागत विद्यार्थियों को संदेश दिया।

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कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में वर्ष 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रावीण्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस मौके ने नवागत विद्यार्थियों को जहां अपने वरिष्ठों से सीखने का अवसर दिया, वहीं उन्हें मीडिया और संचार के बदलते क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रेरित भी किया।

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