बेला एस्टेट वोटर लिस्ट पर EC का जवाब
दिल्ली की बेला एस्टेट बस्ती में एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट से नाम हटने के आरोपों पर चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के मुताबिक संबंधित ERO मामले को देख चुके हैं। पात्र नागरिकों को राहत देते हुए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। नाम छूटने पर फॉर्म-6 के जरिए दोबारा पंजीकरण का विकल्प भी उपलब्ध है।
- बेला एस्टेट वोटर लिस्ट: 727 नाम हटने के राहुल गांधी के दावे पर EC ने जवाब दिया।
- SIR विवाद: आयोग ने कहा कि संबंधित ERO पहले ही मामले को देख चुके हैं।
- 30 अक्टूबर 2026: पात्र लोगों को दावे-आपत्तियां दाखिल करने और जरूरत पड़ने पर फॉर्म-6 से पंजीकरण का विकल्प।
Bela Estate Voter List Row: EC Responds: नई दिल्ली। दिल्ली की बेला एस्टेट बस्ती में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता सूची में नामों को लेकर विवाद सामने आया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि बस्ती के 728 लोगों में से 727 के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं। उनके बयान के बाद चुनाव आयोग ने मामले पर अपना पक्ष सामने रखा है।
नाव आयोग के मुताबिक, बेला एस्टेट से जुड़ा मामला संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ERO पहले ही देख चुके हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिल्ली में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सूची में नाम शामिल कराने का अवसर देना है।
आयोग ने कहा है कि अगर किसी पात्र नागरिक का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरकर पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदन ERO, AERO या BLO के माध्यम से भी जमा किया जा सकता है। चुनाव आयोग की मतदाता सेवाओं में नए मतदाता के पंजीकरण और मतदाता सूची में नाम से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
विवाद की शुरुआत राहुल गांधी के बेला एस्टेट दौरे के बाद हुई। उन्होंने वहां रहने वाले लोगों से बातचीत का वीडियो साझा करते हुए कहा कि SIR के बाद 728 में से केवल एक नाम वोटर लिस्ट में बचा है। राहुल गांधी के अनुसार, ये लोग लंबे समय से इलाके में रह रहे हैं और 2024 के लोकसभा तथा 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान भी कर चुके हैं।
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राहुल गांधी ने यह भी कहा कि 2023 में बस्ती में लोगों के घर तोड़े गए थे, लेकिन इसके बाद भी वे वहीं रह रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि घर नहीं होने की स्थिति को वोट देने के अधिकार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ये दावे फिलहाल राहुल गांधी के बयान के रूप में हैं; चुनाव आयोग ने अपनी ओर से ERO द्वारा मामले को देखे जाने और पात्र नागरिकों के लिए दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया उपलब्ध होने की बात कही है।
मतदाता अपने नाम की स्थिति आधिकारिक Voters’ Services Portal पर भी जांच सकते हैं। आयोग की वेबसाइट पर SIR से जुड़ी मतदाता सूची और नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है।
मामले में अब सबसे अहम प्रक्रिया दावे और आपत्तियों की है। पात्र नागरिक निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन देकर अपने नाम से जुड़ी स्थिति स्पष्ट करा सकते हैं। इससे बेला एस्टेट की वोटर लिस्ट को लेकर उठे सवालों पर प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया का रास्ता खुला है।



