‘KPSC को अब बंद कर देना चाहिए…’, करप्शन पर भड़के CM डीके शिवकुमार का बड़ा बयान
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केपीएससी (KPSC) में फैले भ्रष्टाचार पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे पूरी तरह से बंद करने के संकेत दिए हैं। हाईकोर्ट द्वारा एसआईटी जांच के आदेश पर उन्होंने कहा कि सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं है। इसके अलावा सीएम ने सौजन्या केस, राज्य की वित्तीय स्थिति और पांच गारंटी योजनाओं पर भी खुलकर अपनी बात रखी।
- 👉 CM डीके शिवकुमार ने सख्त लहजे में कहा कि KPSC में बड़े पैमाने पर भ्रष्ट तत्व घुस चुके हैं, इसलिए इस आयोग को बंद करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
- 👉 KPSC घोटाले की जांच पर सीएम ने कहा कि पुलिस और सीआईडी अच्छा काम कर रही हैं, और हमें अदालत द्वारा तय की गई एसआईटी या ईडी की जांच से भी कोई गुरेज नहीं है।
- 👉 महंगाई से आम आदमी को राहत देने के लिए CM डीके शिवकुमार ने मुफ्त बिजली जैसी 5 गारंटी योजनाओं को बेहद जरूरी बताया और बचाव किया।
CM DK Shivakumar Hints at Shutting Down KPSC Amid Corruption; Defends Freebie Schemes: क्या सरकारी भर्तियां करने वाला आयोग ही भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है? कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के ताजा और बेहद आक्रामक बयान ने कुछ ऐसे ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने कई अहम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। राज्य की वित्तीय स्थिति और विपक्ष द्वारा मुफ्त योजनाओं पर उठाए जा रहे सवालों का करारा जवाब देते हुए सीएम ने साफ किया कि महंगाई के इस दौर में आम जनता का गुजारा मुश्किल हो गया है। लोगों की आमदनी घट रही है, इसीलिए सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और घरों के लिए मुफ्त बिजली जैसी 5 गारंटी योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें मालूम है कि बजट को कैसे संतुलित करना है और किन गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करनी है।
सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब बात केपीएससी (कर्नाटक लोक सेवा आयोग) की आई। हाईकोर्ट द्वारा केपीएससी घोटाले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के आदेश पर सीएम ने कहा कि सरकार को किसी भी जांच से कोई ऐतराज नहीं है। राज्य पुलिस, सीआईडी और ईडी पहले से ही अपना काम कर रहे हैं। लेकिन असली बात तो यह है कि आयोग के अंदर ही सड़ांध फैल चुकी है। शिवकुमार ने हैरान करते हुए कहा, “सच कहूं तो हम विशेषज्ञों के साथ इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि केपीएससी को कैसे बंद किया जाए। इसमें कुछ बड़े भ्रष्ट तत्व जड़ें जमा चुके हैं और चेयरमैन समेत कई शीर्ष लोगों के खिलाफ पक्के सबूत भी मिल चुके हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जांच के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करना सरकार का अधिकार है और कोर्ट इसमें कैसे दखल दे सकता है, यह एक बड़ी बहस का विषय है।
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सियासी और प्रशासनिक सरगर्मियों के बीच, मुख्यमंत्री ने राज्य के तकनीकी विकास से जुड़े एक बेहद सकारात्मक कार्यक्रम में भी शिरकत की। राज्य की टेक और ई-गवर्नेंस यात्रा के अगुवा रहे ‘केईओएनआईसीएस’ (KEONICS) के 50 साल पूरे होने पर आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में उन्होंने हिस्सा लिया। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के साथ मंच साझा करते हुए सीएम ने बताया कि ग्रामीण छात्रों के भविष्य को संवारने के लिए हाल ही में एक खास ‘एआई पीसी’ लॉन्च किया गया है। आने वाले समय में बेंगलुरु के अलावा मंगलुरु और गुलबर्गा में भी ऐसी तकनीकी पहल का विस्तार किया जाएगा।
अंत में, राज्य के बहुचर्चित सौजन्या रेप और मर्डर केस पर भी सीएम ने अपना रुख साफ किया। 17 वर्षीय छात्रा के साथ हुई इस दरिंदगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नई एसआईटी बनाने का आदेश दिया है। इस पर शिवकुमार ने कहा कि उन्हें अभी फैसले की पूरी कॉपी पढ़नी है, लेकिन उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार किसी भी मामले की कानूनी प्रक्रिया में कोई दखलंदाजी नहीं करेगी। कानून सख्ती से अपना काम करेगा।



