ईडी का दायरा बढ़ेगा, 60% बढ़ेंगे पद
केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद प्रवर्तन निदेशालय के कामकाज का दायरा बढ़ने वाला है। कैडर पुनर्गठन के तहत स्वीकृत पदों की संख्या 2,029 से बढ़कर 3,256 होगी। पीएमएलए और फेमा जांच के लिए नए जोन और कार्य इकाइयां बनाई जाएंगी। ईडी ने आर्थिक अपराध, साइबर क्राइम और बैंक धोखाधड़ी जैसे मामलों में जांच तेज करने की रणनीति भी तैयार की है।
- ईडी का दायरा बढ़ने के साथ स्वीकृत पदों की संख्या 60 प्रतिशत बढ़ेगी।
- कैडर पुनर्गठन के बाद ईडी में 3,256 स्वीकृत पद होंगे।
- पीएमएलए और फेमा के लिए नए जोन बनाकर जांच व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
ED Set for Major Expansion : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब पहले से बड़े ढांचे के साथ काम करेगा। केंद्र सरकार ने लंबे समय से लंबित कैडर पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। इसके बाद निदेशालय के स्वीकृत पदों की संख्या 2,029 से बढ़कर 3,256 हो जाएगी। यानी मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले पदों में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।
इस बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है और नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। पुनर्गठन के तहत जांच के लिए ईडी की कार्य इकाइयों की संख्या भी 131 से बढ़ाकर 241 की जाएगी।
इस संबंध में जानकारी ईडी ने बेंगलुरु स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में 14 और 15 सितंबर को हुए 36वें त्रैमासिक क्षेत्रीय अधिकारियों के सम्मेलन के बाद साझा की। बैठक में ईडी निदेशक के साथ मुख्यालय और देशभर के क्षेत्रीय कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
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नई व्यवस्था में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) से जुड़े मामलों के लिए 50 जोन बनाने की योजना है। वहीं विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के मामलों के लिए दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पांच अलग-अलग जोन प्रस्तावित किए गए हैं।
कैडर का विस्तार ऐसे समय हो रहा है जब आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच और संपत्तियों की कार्रवाई को लेकर एजेंसी पर काम का दबाव लगातार बढ़ा है। सम्मेलन में ईडी निदेशक ने अधिकारियों से बैंक धोखाधड़ी, बिल्डर-खरीदार विवाद, आर्थिक अपराध, आईबीसी से जुड़े मामलों और साइबर अपराधों की जांच में तेजी लाने को कहा।
बैठक में लंबित मामलों को जल्द निपटाने के साथ मुकदमों में दोषसिद्धि की दर बेहतर करने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए हर क्षेत्र को कम से कम 10 महत्वपूर्ण मामलों की पहचान करने और उनके मुकदमों को छह से आठ महीने के भीतर अंतिम चरण तक पहुंचाने का प्रयास करने को कहा गया है।
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ईडी ने अपराध से अर्जित संपत्तियों को वास्तविक पीड़ितों तक वापस पहुंचाने को भी प्राथमिकता में रखा है। एजेंसी के मुताबिक, अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां पीड़ितों को लौटाने के लिए चिह्नित या हस्तांतरित की जा चुकी हैं।
सम्मेलन में जांच को आधुनिक बनाने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने तकनीक, साइबर फॉरेंसिक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बेहतर इस्तेमाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार किया। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों की जांच क्षमता बढ़ाना भी चर्चा के प्रमुख विषयों में रहा।



