2003 वोटर लिस्ट की शर्त हटी, Form-6 हुआ आसान
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SIR पूरा कर चुके राज्यों में ऑनलाइन Form-6 से अतिरिक्त घोषणा हटाई गई है। अब नए मतदाताओं और SIR के दौरान नाम हटने के बाद दोबारा पंजीकरण कराने वालों से 2003 की वोटर लिस्ट में माता-पिता या दादा-दादी का नाम होने की जानकारी नहीं मांगी जाएगी। हालांकि, सामान्य पात्रता और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।
- Form-6: 2003 की वोटर लिस्ट से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटाई गई।
- SIR: प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में नया नियम लागू।
- वोटर रजिस्ट्रेशन: नए और दोबारा आवेदन करने वाले मतदाताओं को राहत।
Form-6 Simplified, 2003 Voter List Declaration Removed: नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े Form-6 में बड़ा बदलाव किया है। ऑनलाइन Form-6 से SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है। यह बदलाव ECINET पोर्टल पर मंगलवार देर रात किया गया। आयोग ने 26 सितंबर को इस बदलाव की जानकारी सार्वजनिक की थी।
इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो पहली बार मतदाता के तौर पर अपना नाम दर्ज करा रहे हैं। अब उन्हें Form-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी का 2003 की वोटर लिस्ट से संबंधित विवरण देने की अतिरिक्त घोषणा नहीं करनी होगी।
इसी तरह, SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं और वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें भी यह साबित करने की अतिरिक्त घोषणा नहीं करनी होगी कि उनका या उनके माता-पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज था।
हालांकि, इस बदलाव को वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया खत्म होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। Form-6 के तहत सामान्य आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और जरूरी जांच पहले की तरह लागू रहेंगी।
किन राज्यों में लागू हुआ बदलाव?
SIR के पहले और दूसरे चरण में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल रहे हैं। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां Form-6 से यह अतिरिक्त घोषणा हटाई गई है।
वहीं, जिन स्थानों पर SIR अभी जारी है, वहां Form-6 में संबंधित घोषणा फिलहाल दिखाई देती रहेगी। यानी नियम का इस्तेमाल SIR की स्थिति के आधार पर अलग-अलग किया जा रहा है।
चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Form-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी शामिल किए जाने को लेकर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, आपत्ति का एक प्रमुख आधार यह था कि निर्धारित नियमों में बदलाव किए बिना वैधानिक Form-6 में नया हिस्सा जोड़ा गया। विवेक जोशी ने कथित तौर पर कहा था कि Form-6 नियमों के तहत निर्धारित होता है और उसमें बदलाव के लिए पहले नियमों में संशोधन किया जाना चाहिए।
वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने इस अतिरिक्त हिस्से को हटाने की बात कही थी और इसे लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज की थी।
नए बदलाव के बाद फिलहाल SIR पूरा कर चुके राज्यों में Form-6 पहले की तुलना में सरल दिखाई देगा। खासकर पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए 2003 की वोटर लिस्ट से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देने की आवश्यकता नहीं रहेगी।



