सुशासन ही भरोसे की असली नींव: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि सुशासन निवेशकों के भरोसे और जनता के विश्वास को मजबूत रखने वाला अदृश्य ढांचा है। भारत मंडपम में आईसीएसआई के 58वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि तकनीक फैसले लेने का तरीका बदल सकती है, लेकिन ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदारी की जरूरत हमेशा इंसानों से ही जुड़ी रहेगी।

  • सुशासन निवेशकों के भरोसे और जनविश्वास की नींव है।
  • आईसीएसआई को कॉरपोरेट सुशासन का प्रहरी बताया गया।
  • उपराष्ट्रपति ने तकनीक के साथ ईमानदारी और जवाबदेही पर जोर दिया।

Good Governance Builds Public and Investor Trust :  उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि मजबूत सुशासन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और संस्थानों में भरोसा कायम रखने का आधार है। उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से निर्णय लेने के तौर-तरीकों को बदल रही है, लेकिन ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदारी का महत्व कभी कम नहीं होगा।

राधाकृष्णन रविवार को भारत मंडपम में भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) के 58वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संस्थान की करीब छह दशक की यात्रा की सराहना करते हुए पारदर्शी, नैतिक और समावेशी कॉरपोरेट सुशासन को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

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उपराष्ट्रपति ने कंपनी सचिवों को सुशासन का प्रहरी बताते हुए कहा कि वे भारतीय कंपनियों में विश्वास का माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार, आईसीएसआई अब केवल नियामकीय अनुपालन तक सीमित संस्था नहीं रह गया है, बल्कि कॉरपोरेट पारदर्शिता और निवेशकों के हितों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि जब नागरिक सरकार को कर देते हैं तो उन्हें जिम्मेदार और जवाबदेह शासन की उम्मीद होती है। इसी तरह निवेशक भी चाहते हैं कि कंपनियां पारदर्शी तरीके से काम करें और उनके हितों की रक्षा करें। ऐसे में सुशासन दोनों स्तरों पर भरोसा बनाए रखने का काम करता है।

तेजी से बदलती तकनीक का जिक्र करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत डेटा विश्लेषण और नए कारोबारी मॉडल कंपनी सचिवों की भूमिका को और चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। उन्होंने पेशेवरों से कानूनी समझ के साथ रणनीतिक और नैतिक आधार को भी मजबूत रखने की अपील की।

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उन्होंने साफ कहा कि तकनीक सूचना जुटाने और निर्णय लेने में मदद कर सकती है, लेकिन किसी फैसले के पीछे की ईमानदारी और जवाबदेही इंसानी मूल्यों से ही तय होगी। यही वजह है कि भविष्य में कंपनी सचिवों की जिम्मेदारी केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं रहेगी।

राधाकृष्णन ने युवाओं के लिए कंपनी सचिव के पेशे में ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों तक संस्थान की पहुंच बढ़ाने और शुल्क माफी जैसी पहलों की सराहना की। इस दौरान उन्होंने एमएसएमई के लिए अनुपालन कैलेंडर 2027 भी जारी किया।

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