मोदी की विदेश नीति का असर? दुनिया के कई बंद हुए दरवाजे अब खुले
ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड की हालिया यात्रा के दौरान भारत को ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिलीं। यूरेनियम आपूर्ति, रक्षा निर्यात, समुद्री सहयोग और निवेश समझौतों को भारत की बदलती वैश्विक भूमिका का संकेत माना जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की रणनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है।
- मोदी की विदेश नीति के तहत ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता साफ हुआ।
- भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूती देते हुए इंडोनेशिया के साथ रक्षा और समुद्री सहयोग बढ़ा।
- मोदी की विदेश नीति के जरिए न्यूजीलैंड के साथ व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिली।
The impact of Modi’s foreign policy : भारत की हालिया विदेश कूटनीति ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर उसकी बदलती भूमिका को रेखांकित किया है। ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड की यात्रा के दौरान ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और सामरिक सहयोग से जुड़े कई अहम समझौते सामने आए, जिन्हें भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है।
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सबसे अधिक चर्चा ऑस्ट्रेलिया के उस फैसले की रही, जिसके तहत भारत को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए यूरेनियम उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हुआ। कभी परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का हवाला देकर भारत को यूरेनियम देने से इनकार करने वाला ऑस्ट्रेलिया अब नागरिक परमाणु सहयोग को आगे बढ़ा रहा है। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की परमाणु क्षमता के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इंडोनेशिया यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग का नया अध्याय जुड़ा। दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अन्य रक्षा प्रणालियों से जुड़े समझौतों पर सहमति बनी। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
सिर्फ रक्षा ही नहीं, दोनों देशों ने मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित सबांग बंदरगाह के विकास में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। यह परियोजना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों, विशेषकर निकेल, के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक एवं सैन्य सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया। इसके बाद योग्यकार्ता में भारत ने ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहयोग का संकल्प भी दोहराया।
न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान भी दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने का निर्णय लिया। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, व्यापार विस्तार और रक्षा लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। साथ ही वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लक्ष्य पर भी काम करने का फैसला किया गया।
व्यापार के मोर्चे पर ऑस्ट्रेलिया के साथ भी सकारात्मक प्रगति देखने को मिली। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों ने भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की इच्छा भी जताई है, जिससे आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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इन सभी घटनाक्रमों को मिलाकर देखें तो भारत की विदेश नीति अब केवल पारंपरिक कूटनीति तक सीमित नहीं रह गई है। ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा निर्यात, आर्थिक साझेदारी, समुद्री रणनीति और सांस्कृतिक संबंधों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की वैश्विक भूमिका और रणनीतिक प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा है।



