नेपाल बाढ़: भारत की मदद की दूसरी बड़ी खेप रवाना

नेपाल में भोटेकोशी नदी की अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही के बीच भारत ने राहत अभियान तेज कर दिया है। पहली खेप में 10 टन सहायता भेजने के बाद अब 37.5 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री नेपाल रवाना की गई है। इसमें दवाइयां, खाद्य पैकेट और जरूरी सामान शामिल हैं। भारत ने राहत कार्यों में हर संभव सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया है।

  • नेपाल बाढ़ के बाद भारत ने 37.5 टन राहत सामग्री की दूसरी खेप भेजी।
  • भोटेकोशी नदी में आई फ्लैश फ्लड से कई जिलों में भारी तबाही हुई।
  • भारत की सहायता में दवाइयां, खाद्य पैकेट और HADR सामग्री शामिल है।

India Sends 37.5 Ton Relief Aid to Nepal: नई दिल्ली। नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच भारत ने मदद का सिलसिला और तेज कर दिया है। गुरुवार को भारत ने 37.5 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री लेकर दूसरी उड़ान नेपाल के लिए रवाना की।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि भारत नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्यों में भारत की ओर से हर संभव सहयोग जारी रहेगा।

दूसरी खेप में आपदा राहत के लिए जरूरी HADR सामग्री के साथ दवाइयां और खाद्य पैकेट भेजे गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और वहां चल रहे राहत प्रयासों को पूरा समर्थन देता रहेगा।

इससे एक दिन पहले बुधवार को भारत ने 10 टन मानवीय सहायता की पहली खेप नेपाल भेजी थी। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह सामग्री नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को औपचारिक रूप से सौंपी थी। राहत सामग्री में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की जरूरत का सामान शामिल था।

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नेपाल में आई इस आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गुरुवार सुबह तक 162 शव बरामद किए जा चुके थे। पुलिस के मुताबिक, ये शव भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के निचले इलाकों में अलग-अलग स्थानों से मिले हैं। प्रभावित इलाकों में रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी के दोनों जिले शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे का प्रवाह हिमस्खलन के कारण अचानक रुक गया था। इसके बाद पानी के तेज बहाव ने नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र के तिमुरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। खास बात यह रही कि उस समय इलाके में बारिश नहीं हो रही थी। ऐसे में स्थानीय लोगों को अचानक आई इस बाढ़ का पहले से कोई अंदाजा नहीं था और कई लोग सामान्य दिनों की तरह अपने काम में व्यस्त थे।

भारत की ओर से राहत सामग्री की लगातार आपूर्ति ऐसे समय में हो रही है, जब नेपाल में प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी मदद पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय के जरिए राहत अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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