हल्द्वानी शुद्धीकरण मामले पर खड़गे का नड्डा को पत्र
हल्द्वानी में अपनी जनसभा के बाद कथित शुद्धीकरण की घटना को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। खड़गे ने सवाल उठाया कि घटना के करीब 24 दिन बाद भी संबंधित लोगों और संगठनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई। उन्होंने नड्डा से उत्तराखंड सरकार को कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।
- हल्द्वानी शुद्धीकरण मामले में एफआईआर नहीं होने पर खड़गे ने जताई नाराजगी।
- मल्लिकार्जुन खड़गे ने जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की।
- रामलीला मैदान में हुई घटना को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने संविधान और सामाजिक समानता का मुद्दा उठाया।
Kharge Seeks Action in Haldwani Purification Case: नई दिल्ली। हल्द्वानी में अपनी जनसभा के बाद कथित तौर पर कराए गए शुद्धीकरण को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का ध्यान फिर से इस मामले की ओर खींचा है। उन्होंने पत्र के जरिए कहा कि घटना को करीब 24 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन अभी तक दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
खड़गे ने अपने पत्र में 13 अगस्त को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 8 अगस्त को हल्द्वानी में उनकी जनसभा के बाद हुई कथित शुद्धीकरण की घटना ने उन्हें बेहद आहत किया था। उनके मुताबिक, उन्होंने इसी पीड़ा को सदन में सामने रखा था।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी याद दिलाया कि उस समय जेपी नड्डा ने सदन में घटना को दुखद बताते हुए इसकी जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया था। नड्डा ने यह भी कहा था कि इस तरह की गतिविधियों का भारतीय जनता पार्टी समर्थन नहीं करती है।
खड़गे का आरोप है कि उस आश्वासन के बावजूद अब तक मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है, बल्कि सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी कुरीतियों से जुड़े करोड़ों लोगों की भावनाओं का विषय है।
पत्र में खड़गे ने रामलीला मैदान का भी उल्लेख किया, जहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया था। उनका कहना है कि उसी स्थान पर कथित शुद्धीकरण कराया जाना संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इस प्रक्रिया को छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की।
खड़गे ने अपने पत्र में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के महाड़ आंदोलन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि उस दौर में भी जातिगत भेदभाव की मानसिकता रखने वाले लोगों ने आंबेडकर के तालाब से पानी पीने के बाद उस स्थान को गोमूत्र और गोबर से ‘शुद्ध’ करने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक, धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर की गई ऐसी प्रक्रिया को जातिगत भेदभाव से अलग नहीं किया जा सकता।
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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई जरूरी है, ताकि ऐसी मानसिकता को बढ़ावा देने वालों को स्पष्ट संदेश दिया जा सके। उन्होंने इसे व्यापक सामाजिक सरोकार का मुद्दा बताते हुए कहा कि उनका विरोध केवल व्यक्तिगत नहीं है।
खड़गे ने जेपी नड्डा से आग्रह किया कि राज्यसभा में दिए गए आश्वासन और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। उन्होंने मांग की कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित शुद्धीकरण की घटना में शामिल व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



