जन्माष्टमी पर देशभर में कृष्ण भक्ति की धूम
भगवान श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव पर देशभर के मंदिरों में भक्ति और उल्लास का माहौल है। मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है और ब्रज मंडल में करीब 75 लाख भक्तों के पहुंचने का अनुमान है। द्वारका, दिल्ली, जयपुर, पुरी और नाथद्वारा समेत कई शहरों में विशेष पूजा, आरती और धार्मिक आयोजन हो रहे हैं।
- श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मंदिरों में मंगला आरती से उत्सव शुरू हुआ।
- मथुरा-वृंदावन में 75 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
- जन्माष्टमी पर नाथद्वारा में 21 तोपों की सलामी और पुरी में अनूठी धार्मिक रस्म होगी।
Krishna Janmashtami Celebrations Across India: नई दिल्ली/मथुरा/द्वारका/पुरी। भगवान श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव को लेकर देशभर में उत्साह चरम पर है। मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि से लेकर गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर और दिल्ली के इस्कॉन व बिड़ला मंदिर तक सुबह से ही विशेष पूजा और मंगला आरती का दौर शुरू हो गया। मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है, जबकि दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
सबसे ज्यादा उत्साह ब्रज क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। मथुरा-वृंदावन में गुरुवार रात से ही देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से आए भक्तों की भीड़ जुटने लगी। प्रशासन ने पूरे ब्रज मंडल में करीब 75 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान जताया है। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
इस बीच काशी और मथुरा की धार्मिक परंपरा भी जन्मोत्सव से जुड़ी नजर आई। वर्ष 2024 से चली आ रही परंपरा के तहत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से विशेष टोली मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंची। टोली ने लड्डू गोपाल के लिए पारंपरिक उपहार और पूजन सामग्री भेंट की।
राजस्थान के नाथद्वारा में भी जन्मोत्सव की खास परंपरा निभाई गई। राजसमंद जिले में स्थित प्रसिद्ध श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्रीनाथजी को 21 तोपों की शाही सलामी दी गई। मंदिर से जुड़ी जानकारी के अनुसार, जन्मोत्सव के मौके पर तोपों की सलामी देने की यह परंपरा करीब 352 वर्षों से चली आ रही है। धार्मिक आयोजन के साथ यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा बन चुकी है।
ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में जन्माष्टमी का आयोजन अपनी अनूठी धार्मिक परंपरा के लिए खास है। यहां एक विशेष गुप्त अनुष्ठान के दौरान मुख्य मंदिर के कपाट करीब पांच घंटे तक आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रस्म में भगवान जगन्नाथ माता यशोदा के वात्सल्य स्वरूप में श्रीकृष्ण के जन्म की प्रतीकात्मक लीला करते हैं।
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में भी जन्माष्टमी का रंग देखने को मिला। सनातन सभा के आयोजन में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप में सजे बच्चों ने लोगों का ध्यान खींचा। स्थानीय संगठनों की ओर से तैयार की गई हस्तनिर्मित झांकियां भी शोभायात्रा का प्रमुख आकर्षण रहीं।
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देश के कई बड़े मंदिरों में रात के आयोजन की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। दिल्ली के बिड़ला मंदिर और इस्कॉन मंदिर, द्वारका के मुख्य द्वारकाधीश मंदिर तथा पटना के इस्कॉन मंदिर को फूलों और सतरंगी रोशनी से सजाया गया है। मध्यरात्रि में निशीथ काल के दौरान पंचामृत अभिषेक और महाआरती के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का मुख्य आयोजन होगा।
द्वारका और मथुरा के अलावा जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर में भी सुबह से विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी है। देशभर में मंदिरों में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के बीच श्रद्धालु कान्हा के जन्म का इंतजार कर रहे हैं। कृष्ण जन्मोत्सव ने एक बार फिर देश के अलग-अलग हिस्सों को भक्ति और उत्सव के रंग में रंग दिया है।



