महाकाल मंदिर ने रचा नया रिकॉर्ड, सावन में 14.22 करोड़ की कमाई
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में इस बार सावन श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की आय, दोनों के लिहाज से खास रहा। एक महीने में 1.53 करोड़ से अधिक भक्त पहुंचे। शीघ्र दर्शन टिकटों से 14.22 करोड़ रुपये मिले, जबकि लड्डू प्रसादी की बिक्री ने भी 10.32 करोड़ रुपये का आंकड़ा छुआ। पिछले साल के मुकाबले श्रद्धालुओं की संख्या दोगुने से अधिक रही।
- महाकाल मंदिर में सावन के दौरान 1.53 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे।
- शीघ्र दर्शन टिकटों से मंदिर समिति को 14.22 करोड़ रुपये की आय हुई।
- लड्डू प्रसादी की बिक्री से 10.32 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई।
Mahakal Temple Sets New Sawan Record : उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में इस बार सावन के दौरान भक्तों की अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली। मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक के मुताबिक, पूरे श्रावण मास में 1 करोड़ 53 लाख 75 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए।
यह संख्या पिछले वर्ष के करीब 72 लाख श्रद्धालुओं की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। मुख्य मंदिर में 1 करोड़ 10 लाख 90 हजार 725 भक्तों ने सामान्य दर्शन किए, जबकि करीब 43 लाख 75 हजार श्रद्धालु प्रमुख सवारियों और नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे।
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भक्तों की बढ़ती संख्या का सीधा असर मंदिर समिति की आय पर भी पड़ा। सावन के दौरान 5 लाख 66 हजार 350 श्रद्धालुओं ने शीघ्र दर्शन सुविधा का इस्तेमाल किया। इससे मंदिर प्रबंध समिति को 14 करोड़ 22 लाख 37 हजार 500 रुपये की आय प्राप्त हुई।
इसी तरह लड्डू प्रसादी की बिक्री भी काफी अधिक रही। समिति के अनुसार, 2 लाख 18 हजार 662 क्विंटल लड्डू प्रसादी की बिक्री से 10 करोड़ 32 लाख 73 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई।
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सावन में कावड़ यात्रियों की संख्या भी बड़ी रही। पांच लाख से अधिक कावड़िए उज्जैन पहुंचे। इनमें से 2 लाख 71 हजार से ज्यादा यात्रियों के लिए पांच स्थानों पर भोजन की व्यवस्था की गई। वहीं, करीब 10 हजार श्रद्धालुओं को निःशुल्क चरण पादुकाएं दी गईं।
मंदिर के अन्नक्षेत्र में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की। आंकड़ों के मुताबिक, 3 लाख 41 हजार से अधिक भक्तों ने यहां भोजन किया।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार मंदिर प्रशासन ने कुछ नई व्यवस्थाएं भी लागू कीं। अन्नक्षेत्र में मंगलवार और शुक्रवार को ‘रस संगमम्’ के तहत दक्षिण भारतीय भोजन उपलब्ध कराया गया। इसमें इडली, वड़ा, सांभर और चावल शामिल रहे। पहले ही दिन 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने इसका लाभ लिया।
नागपंचमी को लेकर भी ऑनलाइन शीघ्र दर्शन की सुविधा पहले शुरू कर दी गई थी। मंदिर के पट खुलने से तीन दिन पहले 300 रुपये की दर से बुकिंग शुरू हुई, जिससे समिति को पट खुलने से पहले ही 39 लाख रुपये की आय हो गई।



