मंगलुरु रेल संचालन में बड़ा बदलाव

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मंगलुरु के रेल क्षेत्र को दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूर मंडल के अधीन लाया जाएगा। अभी यह क्षेत्र दक्षिण रेलवे, दक्षिण पश्चिम रेलवे और कोंकण रेलवे के बीच बंटा है। एक ही परिचालन क्षेत्र बनने से ट्रेनों के संचालन में समन्वय बेहतर होने और इंटरचेंज से जुड़ी दिक्कतें कम होने की उम्मीद है।

  • मंगलुरु रेल क्षेत्र अब दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूर मंडल के अधीन होगा।
  • रेलवे परियोजनाओं के लिए केरल में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का काम जारी।
  • भूमि अधिग्रहण के लिए रेलवे ने केरल सरकार को 1,976 करोड़ रुपये दिए हैं।

Mangaluru Rail Operations to Come Under Mysuru Division :  मंगलुरु के रेल संचालन को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि मंगलुरु के रेल क्षेत्र को दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) के मैसूर मंडल के अधीन रखा जाएगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग रेलवे जोन के बीच समन्वय से जुड़ी दिक्कतों को कम करना और ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू बनाना है।

रेल मंत्री ने केरल के सांसदों के साथ बैठक के बाद बताया कि फिलहाल मंगलुरु का रेल क्षेत्र दक्षिण रेलवे, दक्षिण पश्चिम रेलवे और कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRCL) के परिचालन क्षेत्रों में बंटा हुआ है। इसके कारण ट्रेनों के इंटरचेंज और संचालन में कई बार अनावश्यक देरी की स्थिति बनती है। एक ही परिचालन क्षेत्र के तहत आने से इन समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी।

यह भी पढ़ें : जयपुर में सार्वजनिक निवेश पर मंथन शुरू

बैठक में केरल में रेलवे के विकास और चल रही परियोजनाओं की भी जानकारी दी गई। वैष्णव के अनुसार, राज्य में रेलवे के लिए बजटीय आवंटन 2014 के 372 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 3,795 करोड़ रुपये हो गया है। उनके मुताबिक पिछले 12 वर्षों में निवेश बढ़ने का असर रेलवे के बुनियादी ढांचे पर भी दिखाई दिया है।

उन्होंने बताया कि इस अवधि में केरल में करीब 670 किलोमीटर लंबी छह बड़ी दोहरीकरण और गेज परिवर्तन परियोजनाएं पूरी हुई हैं। इसके अलावा 131 फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं। राज्य के रेल नेटवर्क का पूर्ण विद्युतीकरण भी किया जा चुका है।

यह भी पढ़ें : जयपुर में सार्वजनिक निवेश पर मंथन शुरू

रेल मंत्री ने कहा कि केरल में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में चल रही हैं। इनमें नौ मल्टी-ट्रैकिंग या नई रेल लाइन परियोजनाएं, 145 फ्लाईओवर और अंडरपास तथा 19 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की योजनाएं शामिल हैं।

रेल क्षमता बढ़ाने के लिए छह प्रमुख रेल खंडों में तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण से जुड़े डीपीआर के लिए सर्वेक्षण भी चल रहा है। इन प्रस्तावित खंडों की कुल लंबाई 800 किलोमीटर से अधिक है। इनमें शोरनूर-कोयंबटूर, मंगलुरु-शोरनूर, शोरनूर-एर्नाकुलम, एर्नाकुलम-कायमकुलम, कायमकुलम-तिरुवनंतपुरम और तिरुवनंतपुरम-नागरकोइल खंड शामिल हैं।

हालांकि, परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराना अभी बड़ी चुनौती बनी हुई है। रेलवे के मुताबिक केरल में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 618 हेक्टेयर भूमि की जरूरत है, जिसमें से अभी 78 हेक्टेयर यानी करीब 13 प्रतिशत भूमि ही अधिग्रहित हो सकी है। शेष 540 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना बाकी है। इसके लिए रेलवे की ओर से केरल सरकार को 1,976 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।

भूमि अधिग्रहण में देरी का असर अंगमाली-सबरीमाला नई रेल लाइन सहित कुछ परियोजनाओं पर पड़ा है। रेलवे के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के अलावा वन और अन्य वैधानिक मंजूरियां तथा स्थानीय परिस्थितियां भी परियोजनाओं की रफ्तार को प्रभावित करती हैं।

Related Articles

Back to top button