ओडिशा की विरासत देख अभिभूत हुए पत्रकार
केरल, राजस्थान और पंजाब से पहुंचे मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा की समृद्ध कला, संस्कृति और विरासत को करीब से जाना। पीआईबी की अगुवाई में पत्रकारों ने कोणार्क सूर्य मंदिर, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर और रघुराजपुर हेरिटेज विलेज का दौरा किया। यात्रा का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समझ और विरासत आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था की जानकारी बढ़ाना रहा।
- ओडिशा की विरासत से रूबरू हुए पत्रकार
- कोणार्क सूर्य मंदिर और पुरी जगन्नाथ मंदिर का दौरा
- रघुराजपुर में देखी पट्टचित्र और पारंपरिक कला
Journalists overwhelmed by Odisha’s heritage : ओडिशा की कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को करीब से समझने के लिए केरल, राजस्थान और पंजाब के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने राज्य का सांस्कृतिक एवं विकासात्मक दौरा किया। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की अगुवाई में आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य अलग-अलग राज्यों के पत्रकारों के बीच आपसी समझ बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है।

दौरे के दौरान पत्रकारों को ओडिशा की प्राचीन विरासत से लेकर जीवंत लोककला तक को करीब से देखने का अवसर मिला। प्रतिनिधिमंडल ने कोणार्क सूर्य मंदिर, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर और रघुराजपुर हेरिटेज विलेज का भ्रमण किया। इस दौरान सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय स्तर पर विरासत से जुड़ी अर्थव्यवस्था को भी समझा गया।
कोणार्क में दिखी कलिंग वास्तुकला की भव्यता
यात्रा की शुरुआत 13वीं सदी के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर से हुई। UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में पहचान रखने वाला यह मंदिर कलिंग वास्तुकला की अद्भुत मिसाल है। पत्रकारों ने मंदिर परिसर का भ्रमण कर इसकी स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक महत्व को समझा।

प्रतिनिधिमंडल को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से किए जा रहे संरक्षण कार्यों की भी जानकारी दी गई। मंदिर के पत्थरों पर की गई बारीक कारीगरी, प्राचीन धातु-कला और विशाल रथ के 24 पहियों की विशेषताओं ने पत्रकारों का ध्यान खींचा। इन पहियों को प्राचीन समय की सटीक समय-मापन व्यवस्था से भी जोड़ा जाता है।
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तटीय क्षेत्र के मौसम का स्मारक पर पड़ने वाले प्रभाव और उसे सुरक्षित रखने के लिए अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों के बारे में भी प्रतिनिधियों को बताया गया। पत्रकारों ने महसूस किया कि कोणार्क की पहचान केवल एक ऐतिहासिक स्मारक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन स्थापत्य और सांस्कृतिक प्रतिभा का जीवंत उदाहरण है।
पुरी में जगन्नाथ परंपरा को जाना
इसके बाद मीडिया प्रतिनिधिमंडल पुरी पहुंचा और श्री जगन्नाथ मंदिर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से समझा। पत्रकारों ने मंदिर से जुड़ी सदियों पुरानी सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और समावेशी संस्कृति के बारे में जानकारी हासिल की।
पुरी की धार्मिक पहचान के साथ यहां की पारंपरिक खान-पान संस्कृति भी प्रतिनिधिमंडल के लिए खास आकर्षण रही। मंदिर से जुड़ी परंपराओं ने उन्हें ओडिशा की आध्यात्मिक और सामाजिक विरासत की गहराई को समझने का अवसर दिया।
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रघुराजपुर में दिखा हुनर का रंग
दौरे का आखिरी पड़ाव रघुराजपुर हेरिटेज विलेज रहा। यह गांव पारंपरिक शिल्प और कलाकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखता है। यहां पत्रकारों ने कारीगरों और चित्रकारों से बातचीत कर उनकी कला को पीढ़ियों से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को समझा।
प्रतिनिधिमंडल ने कलाकारों को पट्टचित्र बनाने का लाइव प्रदर्शन करते देखा। इसके अलावा ताड़ के सूखे पत्तों पर की जाने वाली बारीक नक्काशी, ताल पट्टचित्र और लकड़ी की नक्काशी की कला भी करीब से देखी। यहां की खासियत यह है कि कला केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और आजीविका का हिस्सा भी है।
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इस पूरे दौरे ने पत्रकारों को ओडिशा की विरासत के कई रंगों से परिचित कराया। प्राचीन मंदिरों से लेकर जीवंत हस्तशिल्प परंपराओं तक, यात्रा ने यह भी दिखाया कि संस्कृति का संरक्षण स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ किस तरह आगे बढ़ सकता है।



