मोदी-खालिद मुलाकात: भारत-यूएई रिश्तों को मिली नई रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने निवेश, रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, तकनीक और नवाचार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया।
- मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस ने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
- यूएई निवेश के तहत ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर के एल्युमीनियम प्रोजेक्ट का स्वागत किया गया।
- भारत-यूएई सहयोग में रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों को बढ़ाने पर सहमति बनी।
Modi Meets Abu Dhabi Crown Prince : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के रिश्तों की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी विस्तार से बातचीत हुई।
बैठक में आर्थिक मोर्चे पर खास चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी) की ओर से ओडिशा में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर के इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट में निवेश के फैसले का स्वागत किया। उम्मीद जताई गई कि यह परियोजना ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम उत्पादन के अहम केंद्र के तौर पर विकसित करने में मदद करेगी।
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दोनों नेताओं ने भारत और यूएई के बीच हाल के उच्चस्तरीय संपर्कों से बनी गति को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और मई में प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा के दौरान हुई प्रगति का उल्लेख किया गया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स में भागीदारी देश के रूप में यूएई की सक्रिय भूमिका की सराहना की। दोनों पक्षों ने शिखर सम्मेलन के सकारात्मक परिणामों का स्वागत करते हुए साझा प्राथमिकताओं पर मिलकर काम जारी रखने और ब्रिक्स सहयोग को और प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
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बैठक में यूएई के नए सॉवरेन इन्वेस्टमेंट फंड ‘एल’आईएमएडी’ की संभावित भूमिका पर भी विचार हुआ। दोनों नेताओं का मानना रहा कि यह फंड भारत और अबू धाबी के बीच निवेश और आर्थिक साझेदारी को नए स्तर तक ले जाने में उपयोगी साबित हो सकता है।
इसके अलावा रक्षा और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के साथ परमाणु ऊर्जा, तकनीक और नवाचार में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद की परंपरा को बनाए रखने और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।



