आतंकवाद पर मोदी का कड़ा संदेश, ‘पूरे इकोसिस्टम को करना होगा खत्म’
एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों पर एकजुट कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को नीति का हथियार बनाने वालों को स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए और इस मुद्दे पर किसी भी तरह के दोहरे मापदंड की जगह नहीं होनी चाहिए।
- एससीओ सम्मेलन: मोदी ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को सहयोग के तीन प्रमुख स्तंभ बताया।
- आतंकवाद पर संदेश: वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने पर जोर।
- जनकेंद्रित सहयोग: युवाओं, उद्यमियों और किसानों तक एससीओ के सहयोग का सीधा लाभ पहुंचाने की अपील।
Modi’s Strong Message on Terrorism at SCO : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक और निर्णायक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रह सकती। इसके पीछे मौजूद वित्तीय मदद, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे तंत्र को खत्म करना जरूरी है।
मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के सवाल पर दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने उन देशों के खिलाफ स्पष्ट और कड़ा संदेश देने की बात कही, जो आतंकवाद को अपनी नीतियों का साधन बनाते हैं या आतंकियों को समर्थन और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराते हैं।
एससीओ के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने संगठन के भविष्य की दिशा पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई दशकों में एससीओ ने यूरेशिया के देशों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत किया है। अब अगले 25 वर्षों में इस सहयोग को जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों में बदलना प्राथमिकता होनी चाहिए।
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उन्होंने भारत की एससीओ नीति के तीन प्रमुख आधार सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इन विचारों को केवल घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय ठोस उपलब्धियों में बदलने का समय है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया का लक्ष्य अफगानिस्तान में स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। भारत वहां के लोगों के विकास और मानवीय जरूरतों में सहायता देता रहा है और भविष्य में भी अपना योगदान जारी रखेगा।
पश्चिम एशिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि मौजूदा दौर में किसी एक क्षेत्र में पैदा हुआ संघर्ष लंबे समय तक उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका असर ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संकटों का सबसे गंभीर प्रभाव अक्सर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ता है। मोदी ने एक बार फिर कहा कि तनाव और युद्ध का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए।
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ड्रग तस्करी को प्रधानमंत्री ने युवाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने एससीओ के तहत सुरक्षा, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और मादक पदार्थों से जुड़े खतरों से निपटने के लिए बनाए जा रहे केंद्रों का स्वागत किया। साथ ही इन व्यवस्थाओं को व्यावहारिक सहयोग, बेहतर समन्वय और समय पर कार्रवाई का माध्यम बनाने पर जोर दिया।
कनेक्टिविटी को एससीओ सहयोग का दूसरा महत्वपूर्ण आधार बताते हुए मोदी ने कहा कि बाजारों को जोड़ने, व्यापार को आसान बनाने और विकास के नए अवसर पैदा करने वाली परियोजनाओं का भारत समर्थन करता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कनेक्टिविटी में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए, जो एससीओ चार्टर की मूल भावना के अनुरूप है।



