राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं- फैशन में दिखे भारत की महक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने निफ्ट के संयुक्त दीक्षांत समारोह में युवाओं से वैश्विक बाजार की जरूरतों को समझने के साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि विदेशी ग्राहकों के लिए बनाए गए कपड़ों में भी भारत की पहचान और मिट्टी की खुशबू नजर आनी चाहिए। युवाओं को रोजगार देने वाला बनने और कारीगरों की आय बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।

  • मुर्मु ने कहा, विदेशी बाजारों में भी भारत की महक बनी रहनी चाहिए।
  • निफ्ट के छात्रों से वैश्विक सोच के साथ भारतीय जड़ों से जुड़े रहने की अपील।
  • भारत की महक के साथ विकसित भारत 2047 के निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका।

Murmu’s Message to NIFT Graduates  : नई दिल्ली में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के संयुक्त दीक्षांत समारोह 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फैशन और वस्त्र क्षेत्र से जुड़े युवाओं को भारतीय पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक ग्राहकों के लिए डिजाइन तैयार करते समय भी उनमें भारत की संस्कृति, परंपरा और अपनी मिट्टी की विशिष्टता की झलक होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि वस्त्र और परिधान उद्योग देश की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा होने के साथ करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। उन्होंने छात्रों से ऐसी सोच विकसित करने को कहा, जिससे आधुनिक फैशन के साथ पारंपरिक शिल्पकारों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले।

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मुर्मु ने कहा कि युवाओं की सोच वैश्विक होनी चाहिए, लेकिन उनकी जड़ें भारतीय जीवन मूल्यों से जुड़ी रहनी जरूरी हैं। उनके मुताबिक, किसी डिजाइन या उत्पाद की असली सफलता तब होगी, जब उससे कारीगरों की उत्पादकता और आय बढ़े तथा उनकी पारंपरिक पहचान भी सुरक्षित रहे।

पर्यावरण के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने सर्कुलर इकोनॉमी की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बंगाल की कांथा कढ़ाई और बिहार की सुजनी कला का उदाहरण देते हुए बताया कि बची हुई सामग्री को फेंकने के बजाय उसे नए रूप में इस्तेमाल करना भारतीय शिल्प परंपरा का हिस्सा रहा है। उन्होंने छात्रों से स्थानीय कच्चे माल का इस्तेमाल कर टिकाऊ उत्पाद और ऐसे ब्रांड तैयार करने की अपील की, जिन्हें वैश्विक बाजार में पहचान मिल सके।

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राष्ट्रपति ने निफ्ट में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी उल्लेखनीय बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि करीब 20 साल पहले इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगभग 20 प्रतिशत थी, जबकि मौजूदा समय में समारोह में शामिल करीब चार हजार विद्यार्थियों में 85 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति बताया।

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए मुर्मु ने युवाओं से केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा रोजगार पाने के साथ रोजगार देने वाले भी बनें। क्राफ्ट क्लस्टर इनिशिएटिव जैसे प्रयासों के जरिए बुनकरों और शिल्पकारों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि निफ्ट से निकलने वाले युवा सिर्फ फैशन डिजाइन या फैशन शो तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 2047 के भारत को आकार देने वाली पीढ़ी हैं। उन्होंने छात्रों से लगातार सीखते रहने, माता-पिता के संघर्ष और योगदान को याद रखने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

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