रक्षाबंधन पर PM मोदी का खास संदेश, संस्कृत को लेकर भी कही बड़ी बात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रक्षाबंधन और विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रक्षाबंधन को स्नेह, विश्वास और अपनत्व का पर्व बताते हुए सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं संस्कृत दिवस पर भाषा की समृद्ध परंपरा, ज्ञान और चिंतन में उसके योगदान को याद किया तथा संस्कृत पढ़ने-पढ़ाने वालों और अगली पीढ़ी तक इसका ज्ञान पहुंचाने वालों की सराहना की।

  • रक्षाबंधन : PM मोदी ने सुख-समृद्धि और सफलता की कामना की।
  • विश्व संस्कृत दिवस : संस्कृत की ज्ञान और चिंतन परंपरा को किया याद।
  • PM मोदी : संस्कृत पढ़ने-पढ़ाने वालों के प्रयासों की सराहना की।

PM Modi’s special message on Raksha Bandhan : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को रक्षाबंधन और विश्व संस्कृत दिवस के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग संदेश साझा करते हुए दोनों अवसरों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया।

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रक्षाबंधन के संदेश में प्रधानमंत्री ने देशवासियों के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सफलता की कामना की। उन्होंने कहा कि भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा यह पर्व स्नेह, अपनत्व और आपसी विश्वास की डोर को मजबूत करने वाला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह विश्वास और आत्मीयता हमेशा कायम रहे।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर संस्कृत के एक प्राचीन सुभाषित का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा, “एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥” यह श्लोक भविष्यपुराण के उत्तर पर्व के अध्याय 137 के श्लोक 7 से लिया गया है।

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इस सुभाषित में रक्षासूत्र के महत्व और उसके प्रभाव का वर्णन किया गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को बताया गया है कि रक्षासूत्र विजय, सुख, संतान, अच्छे स्वास्थ्य और धन की कामना से जुड़ा है। प्रधानमंत्री के संदेश में इस प्राचीन परंपरा को आज के पर्व से जोड़ा गया।

वहीं, विश्व संस्कृत दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत भाषा की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया। उन्होंने संस्कृत में शुभकामना संदेश साझा करते हुए कहा कि श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर संस्कृत की शाश्वत समृद्धि का उत्सव मनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत के ज्ञान, चिंतन और रचनात्मकता की लंबे समय से वाहक रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव आज भी कई क्षेत्रों में देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री ने भारत के साथ-साथ दुनिया के उन लोगों की भी सराहना की, जो संस्कृत का अध्ययन और अध्यापन कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने उन लोगों के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया, जो संस्कृत में मौजूद कालजयी ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस तरह उनके दोनों संदेशों में भारतीय परंपरा, संस्कृति और ज्ञान की विरासत को आगे बढ़ाने का भाव प्रमुख रहा।

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