हर स्रोत से सीखने की सीख
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को साझा किए सुभाषितम् के जरिए ज्ञान को लेकर अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समझदार व्यक्ति को ज्ञान के हर स्रोत से उपयोगी बातें ग्रहण करनी चाहिए। मधुमक्खी का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जिस तरह वह अलग-अलग फूलों से रस लेकर शहद बनाती है, उसी तरह इंसान को अलग-अलग स्रोतों से सार्थक ज्ञान लेकर उसे जीवन में उतारना चाहिए।
- सुभाषितम्: पीएम मोदी ने ज्ञान के हर स्रोत से सीखने पर जोर दिया।
- मूल्यवान ज्ञान: समझदार व्यक्ति को अच्छी और उपयोगी बातों को पहचानकर आत्मसात करना चाहिए।
- मधुमक्खी का उदाहरण: अलग-अलग फूलों से रस लेने की तरह हर जगह से ज्ञान ग्रहण करने की सीख दी गई।
PM Modi Shares Lesson on Learning from Every Source : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर ‘सुभाषितम्’ साझा करते हुए ज्ञान हासिल करने की व्यापक सोच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति को किसी एक स्रोत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जहां से भी उपयोगी ज्ञान मिले, उसे ग्रहण करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत के एक श्लोक के माध्यम से इस विचार को सामने रखा। श्लोक में मधुमक्खी का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि जिस प्रकार मधुमक्खी अनेक फूलों से रस एकत्र कर उसे शहद में बदलती है, उसी तरह व्यक्ति को भी अलग-अलग ज्ञान स्रोतों से सार ग्रहण करना चाहिए।
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उन्होंने इस संदेश के जरिए सीखने के प्रति खुले नजरिए और पूर्वाग्रह से दूर रहने की जरूरत बताई। श्लोक का भाव यही है कि ज्ञान किसी एक स्थान, विषय या परंपरा तक सीमित नहीं होता। समझदार व्यक्ति वही है जो अच्छी बात को पहचानकर उसे अपनी समझ और व्यवहार का हिस्सा बना सके।
यह सुभाषित श्रीमद्भागवत महापुराण से लिया गया बताया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस संदेश में आज के दौर में लगातार सीखते रहने और अलग-अलग स्रोतों से मिली उपयोगी जानकारी को आत्मसात करने की प्रासंगिकता भी नजर आती है।



