पीएम मोदी ने बताया सुखी जीवन का मंत्र
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत के एक प्रेरणादायक सुभाषित के जरिए बेहतर और सुखी जीवन के लिए अच्छी संगति, विद्वानों के साथ सार्थक संवाद और निःस्वार्थ लोगों से मित्रता को जरूरी बताया। इससे एक दिन पहले भी उन्होंने करुणा, संतोष, पुरुषार्थ और दृढ़ निश्चय से जुड़े संस्कृत श्लोक के माध्यम से सकारात्मक जीवन का संदेश साझा किया था।
- पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक के जरिए सुखी जीवन का मंत्र बताया।
- संस्कृत श्लोक में अच्छी संगति और विद्वानों से संवाद का महत्व बताया गया।
- सुखी जीवन के लिए निःस्वार्थ लोगों की मित्रता को अहम बताया गया।
PM Modi Shares Mantra for a Happy Life : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इसके जरिए उन्होंने लोगों को जीवन में अच्छे लोगों की संगति रखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने लिखा, “उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथाम्। अलुब्धैः सह मित्रत्वं कुर्वाणो नावसीदति॥”
इसका भावार्थ है कि श्रेष्ठ लोगों की संगति, विद्वानों के साथ सार्थक संवाद और निःस्वार्थ व निर्लोभी लोगों से मित्रता करने वाला व्यक्ति जीवन में निराश या दुखी नहीं होता।
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पीएम मोदी ने इससे एक दिन पहले भी संस्कृत के एक श्लोक के जरिए जीवन में करुणा, संतोष और पुरुषार्थ के महत्व पर जोर दिया था। उन्होंने लिखा था कि करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से वास्तविक खुशी मिलती है। ऐसे भाव समाज में सहयोग और सद्भाव को भी मजबूत करते हैं।
उन्होंने सोमवार को यह श्लोक साझा किया था— “कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः। उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥”
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इसका अर्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि दूसरों के प्रति करुणा रखने से आत्म-सम्मान बढ़ता है और संतोष अपनाने से इच्छाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है। वहीं, पुरुषार्थ से आलस्य तथा दृढ़ निश्चय से निराधार आशंकाओं पर विजय हासिल की जा सकती है।
लगातार दो दिनों तक साझा किए गए इन संदेशों में प्रधानमंत्री ने जीवन को बेहतर बनाने के लिए बाहरी सफलता के साथ-साथ अच्छे व्यवहार, संतोष, मेहनत और सकारात्मक संगति की अहमियत पर ध्यान दिलाया।



