जलवायु संकट पर बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: क्या केवल पेड़ लगाने से बच पाएगी धरती?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतरराष्ट्रीय मंच से साफ किया कि जलवायु परिवर्तन की जटिल चुनौती से निपटने के लिए सुव्यवस्थित नीतियां और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई बेहद जरूरी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कागजी प्रयासों या सिर्फ पेड़ लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रकृति के साथ पारंपरिक तालमेल और संवेदनशील नीतियों को पुनर्स्थापित करना होगा।
- Climate Change से निपटने को सुव्यवस्थित नीतियां और स्थानीय समुदायों की सीधी भागीदारी अनिवार्य।
- राष्ट्रपति ने बचपन का संस्मरण साझा करते हुए समझाया Droupadi Murmu के जीवन में प्रकृति के सम्मान का महत्व।
- खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका की रक्षा के लिए समुदाय-आधारित अनुकूलन मॉडल लागू करने पर जोर।
President Droupadi Murmu Calls for Structured Policy Framework to Fight Climate Change: “अगर हर साल पत्तियां तोड़ी जाती रहीं, तो कोई नन्हा पौधा विशाल वृक्ष का रूप कैसे ले पाएगा?” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह मार्मिक सवाल उठाकर आधुनिक विकास और प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के बीच संतुलन साधने की जोरदार अपील की। नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में उन्होंने नीति-निर्माताओं को सीधे तौर पर चेताया।
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राष्ट्रपति ने अपने बचपन का एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए सभा को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता जंगल से सूखी लकड़ी काटने से पहले हाथ जोड़कर क्षमा मांगते थे और खेत जोतने से पूर्व धरती को नमन करते थे। पिता का कहना था कि सूख जाने के बाद भी पेड़ हमें सहारा देता है और धरती मां बनकर हमारा भरण-पोषण करती है। मुर्मू ने रेखांकित किया कि यह गहरी विनम्रता और आदर भाव सदियों से भारतीय संस्कृति की नींव रहा है।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि जलवायु संकट केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को सीधे चोट पहुंचा रहा है। इससे सबसे अधिक प्रभावित होने वाले ग्रामीण समुदाय, वनवासी, छोटे किसान और महिलाएं हैं। उन्होंने सरकारों और कानूनी विशेषज्ञों से एक ऐसा सुव्यवस्थित नीतिगत ढांचा तैयार करने की मांग की, जिसमें पारंपरिक ज्ञान और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र को प्राथमिकता दी जाए।



