राष्ट्रपति बोलीं- शिक्षा से बनेगा विकसित भारत
शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विकसित भारत का सपना गुणवत्तापूर्ण और विश्वस्तरीय शिक्षा के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की अग्रिम पंक्ति में खड़ा बताया और जोर दिया कि देश का कोई भी विद्यार्थी अच्छी शिक्षा के अवसर से वंचित न रहे। समान अवसर सुनिश्चित करने में शिक्षा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
- विकसित भारत: राष्ट्रपति ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही विकसित भारत का लक्ष्य पूरा होगा।
- शिक्षा: हर विद्यार्थी को अच्छी शिक्षा और समान अवसर मिलना जरूरी है।
- शिक्षक: राष्ट्रपति ने समर्पित शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की अग्रिम पंक्ति का हिस्सा बताया।
Quality Education Key to Developed India : नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षकों की भूमिका को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि जो समाज अपने शिक्षकों का सम्मान करता है, वह वास्तव में प्रगतिशील समाज होता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होते। अपने स्नेह, मेहनत और समर्पण से वे विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास भी विकसित करते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में दर्ज समान अवसर के आदर्श को जमीन पर उतारने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि देश का कोई भी विद्यार्थी अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने के अधिकार से वंचित न हो।
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उन्होंने कहा कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत तथा विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने ओडिशा के रायरंगपुर स्थित श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर में पढ़ाए गए अपने विद्यार्थियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक के रूप में उन्होंने अपने छात्रों से भी बहुत कुछ सीखा।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से मिले प्रेम और स्नेह को अपने जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल बताया। उनके इस अनुभव ने समारोह में मौजूद शिक्षकों के साथ उनके संबोधन को व्यक्तिगत और भावनात्मक स्पर्श दिया।
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राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों से आने वाले शिक्षकों की बड़ी संख्या पर राष्ट्रपति ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेताओं के काम पर तैयार लघु फिल्मों को देखने के बाद उनका विश्वास और मजबूत हुआ है कि समर्पित शिक्षक वास्तव में राष्ट्र निर्माण के अग्रिम मोर्चे पर काम करते हैं।
उन्होंने राजस्थान के झालावाड़ जिले के एक गांव में पढ़ाने वाले शिक्षक का उदाहरण भी दिया। राष्ट्रपति के मुताबिक, इस शिक्षक ने आधुनिक तकनीक और माध्यमों का इस्तेमाल करके बच्चों के लिए जीव विज्ञान जैसे विषय को ज्यादा प्रभावी और रोचक बनाया।
राष्ट्रपति ने शिक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 12 वर्ष पहले देश में प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर लगभग 4.5 प्रतिशत थी, जो अब बेहद कम रह गई है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय शिक्षकों के लगातार प्रयासों को दिया।
समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी, राज्यमंत्री जयंत चौधरी और सुकांत मजूमदार समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।



