ओडिशा में राजस्थान के पत्रकारों का दौरा, विरासत से पर्यटन तक देखा विकास
DCID योजना के तहत ओडिशा पहुंचे राजस्थान के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने पुरी जिले के प्रमुख पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों का जायजा लिया। दल ने कोणार्क सूर्य मंदिर की स्थापत्य विरासत, रघुराजपुर की पट्टाचित्र कला, पुरी के गोल्डन बीच की सुविधाओं और श्री जगन्नाथ मंदिर की धार्मिक परंपराओं को करीब से समझा। इस दौरान स्थानीय कला, पर्यटन, स्वच्छता और विकास व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली गई।
- कोणार्क सूर्य मंदिर की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत देखी।
- रघुराजपुर शिल्प ग्राम में पट्टाचित्र कलाकारों से संवाद किया।
- गोल्डन बीच और जगन्नाथ मंदिर में पर्यटन व धार्मिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
Visit of journalists from Rajasthan to Odisha : जयपुर से ओडिशा पहुंचे पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने पुरी जिले में विभिन्न पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों का दौरा किया। भारत सरकार की डेवलपमेंट कम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन डिसेमिनेशन (DCID) योजना के तहत आयोजित इस दौरे का उद्देश्य जनकल्याणकारी योजनाओं और आधारभूत ढांचे से जुड़े विकास कार्यों की जमीनी स्थिति को समझना और उनकी जानकारी लोगों तक पहुंचाना है।
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दौरे के दौरान पत्रकार दल ने पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन किए। प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर की धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक महत्व और ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान में इसके योगदान के बारे में जानकारी हासिल की। मंदिर परिसर से जुड़ी परंपराओं और श्रद्धा ने पत्रकारों को ओडिशा की आध्यात्मिक विरासत को करीब से समझने का अवसर दिया।
कोणार्क में दिखी शिल्प और स्थापत्य की भव्यता
प्रतिनिधिमंडल ने विश्व धरोहर स्थल कोणार्क सूर्य मंदिर का भी भ्रमण किया। तेरहवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर ओडिशा की प्राचीन स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण माना जाता है। बताया गया कि गंग वंश के राजा नरसिंह देव प्रथम के शासनकाल में करीब 1250 ईस्वी के आसपास इस मंदिर का निर्माण कराया गया था।

सूर्य देव को समर्पित मंदिर की पूरी वास्तु संरचना को एक विशाल रथ की कल्पना के आधार पर विकसित किया गया है। इसके अलंकृत पहिए, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और शिल्पकला आज भी पर्यटकों को आकर्षित करती है।
पत्रकार दल को मंदिर के इतिहास, निर्माण शैली और यहां मौजूद कलात्मक संरचनाओं के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर परिसर का अवलोकन कर यह समझने का प्रयास किया कि किस तरह सदियों पुरानी स्थापत्य विरासत आज भी ओडिशा की पहचान का अहम हिस्सा बनी हुई है।
रघुराजपुर में कलाकारों से सीधा संवाद
कोणार्क के बाद पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने विरासत शिल्प ग्राम रघुराजपुर का रुख किया। यह गांव पारंपरिक पट्टाचित्र कला के लिए देश-विदेश में जाना जाता है। यहां दल ने स्थानीय कलाकारों से मुलाकात की और इस पारंपरिक कला को तैयार करने की प्रक्रिया को समझा।

कलाकारों ने बताया कि पट्टाचित्र में ‘पट्टा’ का अर्थ कपड़ा या कैनवास और ‘चित्र’ का अर्थ पेंटिंग होता है। इस कला में कपड़े की कई परतों को प्राकृतिक सामग्री की मदद से तैयार कर हस्तनिर्मित कैनवास बनाया जाता है। इसके बाद उस पर पारंपरिक तरीके से चित्रकारी की जाती है।
पट्टाचित्र में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। इन चित्रों में धार्मिक और पौराणिक कथाओं के साथ ओडिशा की लोक संस्कृति और परंपराओं को भी जगह मिलती है। पत्रकारों ने कलाकारों से बातचीत कर उनके हुनर, पारंपरिक तकनीक और इस कला को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली।
गोल्डन बीच पर पर्यटन सुविधाओं का जायजा
प्रतिनिधिमंडल ने पुरी के ब्लू फ्लैग प्रमाणित गोल्डन बीच का भी दौरा किया। समुद्र तट पर पत्रकारों ने स्वच्छता व्यवस्था, पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इंतजामों को देखा।
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तटीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकसित व्यवस्थाओं का भी दल ने जायजा लिया। गोल्डन बीच को मिले ब्लू फ्लैग प्रमाणन के संदर्भ में स्वच्छता, पर्यटक सुविधाओं और समुद्र तट के रखरखाव से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी प्रतिनिधिमंडल के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रही।
इस दौरान पत्रकारों ने यह भी देखा कि पर्यटन स्थल की सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच किस तरह संतुलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किए गए इंतजामों को भी समझा गया।
जमीनी विकास को करीब से समझने का अवसर
DCID योजना के तहत आयोजित यह दौरा पत्रकारों के लिए ओडिशा की विरासत और विकास को एक साथ देखने का अवसर बना। एक तरफ कोणार्क सूर्य मंदिर और श्री जगन्नाथ मंदिर जैसी ऐतिहासिक-आध्यात्मिक धरोहरें रहीं, तो दूसरी ओर रघुराजपुर की पारंपरिक कला और पुरी के गोल्डन बीच पर पर्यटन से जुड़ी आधुनिक व्यवस्थाओं की जानकारी मिली।
दौरे का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर हो रहे विकास, जनसुविधाओं, सांस्कृतिक संरक्षण और आधारभूत ढांचे की वास्तविक स्थिति को समझना भी रहा। पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय लोगों और कलाकारों से बातचीत के जरिए जमीनी अनुभव हासिल किए।
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इस तरह मिले प्रत्यक्ष अनुभव और जानकारी को पत्रकार अपने-अपने माध्यमों के जरिए व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचा सकेंगे। इससे ओडिशा में संस्कृति, पर्यटन और विकास से जुड़े प्रयासों की तस्वीर राजस्थान सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों तक भी पहुंचने की उम्मीद है।



