SCO समिट में बड़े फैसले, भारत की पहल को मंजूरी

बिश्केक में SCO के 26वें शिखर सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क और विकास को लेकर अपना पक्ष मजबूती से रखा। सम्मेलन में बिश्केक घोषणापत्र के साथ चार समझौता ज्ञापन और 20 से अधिक फैसले व बयान अपनाए गए। अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा बनाने, सभ्यता संवाद, युवा वैज्ञानिक मंच और युवा लेखक सम्मेलन जैसी भारतीय पहलों को भी मंजूरी मिली।

  • SCO समिट में बिश्केक घोषणापत्र समेत 20 से ज्यादा फैसले मंजूर।
  • भारत ने आतंकवाद के खिलाफ बिना दोहरे मापदंड के कार्रवाई पर जोर दिया।
  • SCO में अंग्रेजी, सभ्यता संवाद और युवा मंच जैसी भारतीय पहलों को मंजूरी।

Major decisions at SCO summit, India’s initiative approved :  शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने बिश्केक घोषणापत्र के साथ कई अहम फैसलों को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए सुरक्षा, संपर्क और विकास के क्षेत्र में ठोस सहयोग की जरूरत बताई। सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुआ और यह SCO की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया।

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विदेश मंत्रालय के अनुसार, बिश्केक घोषणापत्र के अलावा चार समझौता ज्ञापन तथा 20 से अधिक फैसले और बयान अपनाए गए। इनमें जलवायु परिवर्तन, परमाणु सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने जैसे मुद्दे शामिल रहे।

आतंकवाद पर पीएम मोदी का सख्त संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके पूरे नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से मुकाबले में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए।

मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को जरूरी बताते हुए कहा कि युद्ध के मैदान में समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने यूरेशिया की सुरक्षा के संदर्भ में अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता को भी महत्वपूर्ण बताया तथा भारत की ओर से वहां दी जा रही विकासात्मक और मानवीय सहायता का उल्लेख किया।

कनेक्टिविटी पर भारत का जोर

SCO देशों के बीच मजबूत और भरोसेमंद संपर्क व्यवस्था को प्रधानमंत्री ने साझा विकास की अहम कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी कनेक्टिविटी होनी चाहिए, जिससे बाजार आपस में जुड़ें, व्यापार बढ़े और नए आर्थिक अवसर तैयार हों।

हालांकि, भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी संपर्क परियोजना में संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी है। प्रधानमंत्री ने तकनीक, स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता को युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने वाला क्षेत्र बताया।

भारत की कई पहलों को मिली जगह

सम्मेलन में भारत की ओर से प्रस्तावित कई पहलों को भी आगे बढ़ाया गया। इनमें SCO चार्टर में अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करना, SCO Civilisation Dialogue Forum, युवा वैज्ञानिक मंच और युवा लेखक सम्मेलन प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री ने इस साल के अंत में पहले SCO सभ्यता संवाद मंच की मेजबानी करने की इच्छा भी जताई।

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मोदी ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव को सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि SCO की 25वीं वर्षगांठ संगठन के अगले 25 वर्षों की दिशा तय करने का अवसर है। भारत ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर के तीन प्रमुख क्षेत्रों में साझा प्रयासों के जरिए ठोस नतीजे हासिल करने पर जोर दिया।

कुल मिलाकर, बिश्केक सम्मेलन में सुरक्षा से लेकर पर्यावरण, ऊर्जा, नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई और सांस्कृतिक सहयोग तक कई क्षेत्रों में फैसले लिए गए। भारत की ओर से रखी गई पहलों को घोषणापत्र में जगह मिलना सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।

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