दार्जिलिंग के लिए ‘स्थायी समाधान’ पर अमित शाह की बैठक

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग समेत पहाड़ी क्षेत्रों की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक समस्या के समाधान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई। सुकना में हुई इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ गोरखा संगठनों और पहाड़ी राजनीति से जुड़े प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया।

  • अमित शाह की बैठक में दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के स्थायी राजनीतिक समाधान पर चर्चा हुई।
  • गोरखालैंड मुद्दे के साथ GTA, शिक्षकों की नियुक्ति और चाय बागानों से जुड़े विषय भी एजेंडे में रहे।
  • दार्जिलिंग की पहाड़ी राजनीति में केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार से नई उम्मीदें जगी हैं।

Shah Leads Talks on Darjeeling Solution : पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों की राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक मांगों का स्थायी समाधान तलाशने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में शनिवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई। सिलीगुड़ी के पास सुकना में आयोजित बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ पहाड़ की प्रमुख राजनीतिक ताकतों के नेता भी मौजूद रहे।

बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिष्ट और पहाड़ी क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटों के विधायक नोमन राय, भरत कुमार छेत्री और सोनम लामा शामिल हुए। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) के अध्यक्ष बिमल गुरुंग और महासचिव रोशन गिरी ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

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गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (GNLF) के अध्यक्ष मान घीसिंग भी बैठक में मौजूद रहे। मान घीसिंग संगठन के संस्थापक दिवंगत सुभाष घीसिंग के बेटे हैं। अलग-अलग राजनीतिक संगठनों की मौजूदगी से संकेत साफ है कि बातचीत को केवल एक दल तक सीमित रखने के बजाय पहाड़ की व्यापक राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की जा रही है।

बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों के लिए स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशना है। अलग गोरखालैंड की मांग इस क्षेत्र की राजनीति का सबसे संवेदनशील मुद्दा रही है। दशकों से इस मांग को लेकर आंदोलन, राजनीतिक टकराव और केंद्र तथा राज्य सरकारों के साथ बातचीत के कई दौर हो चुके हैं।

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पहाड़ की राजनीति में यह मुद्दा समय-समय पर अलग-अलग रूप में सामने आता रहा है। वाम मोर्चा सरकार के दौर से लेकर तृणमूल कांग्रेस के शासन तक राज्य सरकार और पहाड़ी राजनीतिक दलों के बीच कई बार बातचीत हुई, लेकिन कोई ऐसा समाधान सामने नहीं आया जिसे सभी पक्ष स्थायी तौर पर स्वीकार कर सकें।

अब राजनीतिक परिस्थितियां बदली हुई हैं। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में GJM ने भाजपा का समर्थन किया था। इसके बाद दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जिलों की सभी छह विधानसभा सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत हुई। राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद पहाड़ी दलों को उम्मीद है कि केंद्र और राज्य में समान राजनीतिक गठबंधन होने का फायदा समाधान तलाशने में मिल सकता है।

इसी क्रम में पिछले महीने बिमल गुरुंग और रोशन गिरी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। कोलकाता में हुई इस बातचीत में परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह भी मौजूद थे। करीब डेढ़ घंटे की बैठक के बाद गुरुंग ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ संवाद के जरिए पहाड़ की समस्या का समाधान निकलने की उम्मीद जताई थी।

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