यूपीएससी चयन में बड़े बदलाव की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपीएससी की शताब्दी समारोह में चयन प्रक्रिया को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ज्ञान के साथ अभ्यर्थियों की समस्या समाधान क्षमता, जनसेवा की भावना और दूरदृष्टि परखने की बात कही। परीक्षा चक्र घटाने, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और आयोगों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया।

  • यूपीएससी चयन प्रक्रिया में भविष्य की जरूरतों के अनुसार बदलाव पर जोर।
  • सिविल सेवा भर्ती में जनसेवा की भावना, समस्या समाधान और दूरदृष्टि को महत्व देने की बात।
  • यूपीएससी परीक्षा का चक्र छोटा करने और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर।

UPSC Selection Process May See Major Changes : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपीएससी की चयन प्रक्रिया में समय के साथ बदलाव की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की जरूरतें बदलेंगी, इसलिए सिविल सेवकों के चयन का तरीका भी भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप होना चाहिए।

संघ लोक सेवा आयोग के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल परीक्षा में उम्मीदवार के ज्ञान को देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी समझना जरूरी है कि वह सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है और जनसेवा के प्रति उसकी सोच क्या है।

मोदी ने कहा कि 2047 का भारत आज के मुकाबले अधिक शहरी और आकांक्षी होगा। गांवों और शहरों के बीच का अंतर कम होगा और नागरिकों की सरकारी सेवाओं से अपेक्षाएं भी बढ़ेंगी। ऐसे माहौल में प्रशासन को तेज, संवेदनशील और सक्रिय तरीके से काम करना होगा।

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उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में सरकार के पास बड़ी मात्रा में डेटा और उसे तेजी से संसाधित करने की क्षमता होगी। ऐसे में नागरिक भी समस्याओं के तत्काल समाधान की उम्मीद करेंगे। इसलिए चयन प्रक्रिया में जटिल परिस्थितियों से निपटने की क्षमता और दूरदृष्टि को अधिक महत्व देने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों के सामने आने वाली नई चुनौतियों का भी उल्लेख किया। इनमें सूचना युद्ध, डीपफेक, एल्गोरिद्मिक पक्षपात और जलवायु न्याय जैसे विषय शामिल हैं। उनके मुताबिक आने वाले समय में अधिकारियों को ऐसे मुद्दों पर समझ और प्रभावी निर्णय क्षमता के साथ काम करना होगा।

मोदी ने परीक्षा प्रक्रिया में लगने वाले समय को घटाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में देरी का असर सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर भी पड़ता है। लंबे इंतजार के दौरान कोचिंग, किराये और यात्रा जैसे खर्च बढ़ सकते हैं। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में ‘टाइम सर्टेनिटी’ अपनाने की बात कही।

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प्रधानमंत्री के अनुसार यूपीएससी ने अपने परीक्षा चक्र में करीब 100 दिन की कमी की है। उन्होंने कहा कि परीक्षा के मानकों से समझौता किए बिना प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने केंद्र और राज्य लोक सेवा आयोगों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता भी बताई। श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को साझा करने, अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्यप्रणालियों का अध्ययन करने और तकनीक के जरिए प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बनाने पर जोर दिया गया।
मोदी ने यूपीएससी की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले बड़े शहरों और संसाधन संपन्न परिवारों से आने वाले युवाओं को अधिक अवसर मिलते थे। अब गांवों और छोटे कस्बों के युवाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिलाओं की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ी है और वर्तमान में यह 30 प्रतिशत से अधिक बताई गई।

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