वाल्टेयर से विशाखापट्टनम तक : इतिहास, कमाई और आधुनिक रेल विकास की नई कहानी

विशाखापट्टनम रेलवे मंडल अब इतिहास और आधुनिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। वाल्टेयर मंडल के पुनर्गठन के बाद नए प्रशासनिक ढांचे के साथ स्टेशन और रेल सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है। करीब 800 करोड़ रुपये की प्रस्तावित योजना में स्टेशन को आधुनिक सिटी सेंटर जैसा स्वरूप देने, क्षमता बढ़ाने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर है।

  • 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक राजस्व वाले रेल मंडल का पुनर्गठन, विशाखापट्टनम स्टेशन को मिलेगा आधुनिक ‘सिटी सेंटर’ का स्वरूप
  • 800 करोड़ रूपए की योजना से हो रहा विशाखापट्टनम स्टेशन का कायाकल्प : ललित बोहरा

विनोद शर्मा

Visakhapatnam Railway Enters a New Era : विशाखापट्टनम। कभी वाल्टेयर के नाम से पहचाने जाने वाला विशाखापट्टनम रेलवे क्षेत्र भारतीय रेलवे के इतिहास, माल ढुलाई, राजस्व और यात्री यातायात के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अब यह क्षेत्र एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वाल्टेयर मंडल के पुनर्गठन के बाद विशाखापट्टनम मंडल दक्षिण तट रेलवे के अंतर्गत और रायगड़ा मंडल ईस्ट कोस्ट रेलवे के अंतर्गत कार्य कर रहा है। दक्षिण तट रेलवे का प्रभावी संचालन 1 जून 2026 से शुरू हुआ।

वाल्टेयर से विशाखापट्टनम तक : इतिहास, कमाई और आधुनिक रेल विकास की नई कहानी
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) जयपुर कार्यालय के सहायक निदेशक अमित कन्नौजिया के नेतृत्व में राजस्थान के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आज विशाखापट्टनम रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) ललित बोहरा से विशेष मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विशाखापट्टनम रेल मंडल के इतिहास, उपलब्धियों, माल एवं यात्री परिवहन तथा मंडल के पुनर्गठन सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी प्राप्त की। डीआरएम बोहरा ने रेल मंडल की कार्यप्रणाली, प्रमुख परियोजनाओं एवं भविष्य की विकास योजनाओं से भी प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया।

इतिहास में 1893 से दर्ज है विशाखापट्टनम की रेल यात्रा

विशाखापट्टनम में रेलवे का इतिहास 19वीं सदी के अंतिम दशक से जुड़ा है। ईस्ट कोस्ट स्टेट रेलवे के दौर में 8 अगस्त 1893 को विशाखापट्टनम से कोव्वूर के बीच पहली ट्रेन चली। इसके बाद रेल नेटवर्क का लगातार विस्तार हुआ और 1900 में मद्रास से हावड़ा तक का रेल संपर्क पूरा हुआ।

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आगे चलकर यह क्षेत्र बंगाल नागपुर रेलवे (बीएनआर) का हिस्सा बना। बंदरगाह और रेलवे का संबंध भी इसी दौर में मजबूत हुआ। रेलवे ने बंदरगाह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में पोर्ट अथॉरिटी के गठन के बावजूद दोनों के बीच मजबूत परिचालन संबंध बने रहे।

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विशाखापट्टनम की ऐतिहासिक रेल विरासत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1890 के दशक में ‘बंगाल नागपुर रेलवे’ ने यहाँ बीएनआर रेलवे पोर्ट का निर्माण कराया था। 1892 में निर्मित ऐतिहासिक भवन आज भी मौजूद है। कभी यहां डिविजनल ट्रैफिक सुपरिटेंडेंट का कार्यालय हुआ करता था, जो आगे चलकर डिविजनल सुपरिटेंडेंट और फिर डीआरएम कार्यालय के रूप में विकसित हुआ। वर्तमान डीआरएम कार्यालय भवन 1968 में तैयार हुआ था।

माल ढुलाई और राजस्व में महत्वपूर्ण स्थान

वाल्टेयर मंडल लंबे समय से भारतीय रेलवे के प्रमुख माल ढुलाई वाले क्षेत्रों में रहा है। क्षेत्र के बंदरगाह, स्टील प्लांट और खनिज आधारित उद्योग रेलवे की माल ढुलाई अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं। कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, उर्वरक सहित विभिन्न औद्योगिक वस्तुओं की बड़े पैमाने पर ढुलाई होती है।

पूर्व वाल्टेयर क्षेत्र ने सालाना लगभग 45 से 50 मिलियन टन तक माल लोडिंग का स्तर हासिल किया है। इसके राजस्व का स्तर भी 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक रहा है, जिससे यह भारतीय रेलवे के प्रमुख कमाई वाले मंडलों में शामिल रहा। रेलवे के पुनर्गठन के बाद भी इस क्षेत्र की माल ढुलाई क्षमता का महत्व कम नहीं हुआ है। इसका प्रमाण यह है कि नवगठित रायगड़ा मंडल ने अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान ही 13.71 मिलियन टन माल लोड किया।

वाल्टेयर मंडल का हुआ पुनर्गठन

रेलवे के प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत वाल्टेयर मंडल को दो हिस्सों में विभाजित किया गया है। लगभग 410 किलोमीटर का हिस्सा, जिसमें पलासा-विशाखापट्टनम-दुव्वाडा, कुनेरू-विजयनगरम, नौपाड़ा-पारलाखेमुंडी, बोब्बिली-सालूर सहित कई रेलखंड शामिल हैं, दक्षिण तट रेलवे के अंतर्गत विशाखापट्टनम मंडल के रूप में रखा गया है।

वहीं लगभग 680 किलोमीटर का दूसरा हिस्सा, जिसमें कोट्टावलसा-बचेली, कुनेरू-थेरुवाली, सिंगापुर रोड-कोरापुट तथा पारलाखेमुंडी-गुनपुर जैसे रेलखंड शामिल हैं, रायगड़ा मुख्यालय वाले नए मंडल में शामिल किया गया है। यह पुनर्गठन 2019 में घोषित दक्षिण तट रेलवे की परिकल्पना की दिशा में आगे बढ़ा कदम है।

मंडल का मुख्य आधार क्षेत्र के प्रमुख पोर्ट्स (बंदरगाह) और स्टील प्लांट्स हैं। वर्ष 1930 में पोर्ट अथॉरिटी बनने के बाद भी रेलवे और पोर्ट आपस में गहराई से जुड़े रहे। वर्तमान में पोर्ट के पास 200 किलोमीटर से अधिक की अपनी रेलवे लाइनें हैं, जिन्हें वे स्वयं मेंटेन और ऑपरेट करते हैं।

विशाखापट्टनम स्टेशन का 800 करोड़ रूपए निवेश की योजना से हो रहा कायाकल्प

विशाखापट्टनम रेलवे स्टेशन अब सिर्फ यात्री ठहराव का केंद्र नहीं, बल्कि शहर के आधुनिक ‘सिटी सेंटर’ के रूप में विकसित होने की दिशा में बढ़ रहा है। स्टेशन और इससे जुड़े कोचिंग यार्ड के विकास पर लगभग 800 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। इसमें एक महत्वपूर्ण कदम जुलाई 2026 में उठाया गया, जब भारतीय रेलवे ने विशाखापट्टनम कोचिंग यार्ड के रिमॉडलिंग के लिए 299 करोड़ रुपये मंजूर किए। परियोजना में छह नए प्लेटफॉर्म, छह अतिरिक्त लाइनें, मौजूदा प्लेटफॉर्मों का विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, ईस्ट-साइड स्टेशन प्रवेश, पार्किंग और बेहतर सर्कुलेशन व्यवस्था शामिल है।

पुनर्विकास योजना के तहत स्टेशन पर प्लेटफॉर्मों की संख्या 8 से बढ़ाकर 14 करने की दिशा में काम हो रहा है। वर्तमान में यहां प्रतिदिन लगभग 90 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है। उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाली अनेक महत्वपूर्ण ट्रेनें विशाखापट्टनम होकर गुजरती हैं, जिससे यह स्टेशन एक महत्वपूर्ण रेल जंक्शन की भूमिका निभाता है। वर्तमान में विशाखापट्टनम स्टेशन से प्रतिदिन कुल 230 यात्री ट्रेनें संचालित हो रही है।

चक्रवात झेलने में सक्षम होगी नई इमारत

तटीय क्षेत्र होने और वर्ष 2014 के हुदहुद चक्रवात जैसे अनुभवों को ध्यान में रखते हुए स्टेशन के नए भवन की डिजाइन में आपदा प्रबंधन को विशेष महत्व दिया गया है। नई इमारत को तेज हवाओं और गंभीर चक्रवाती परिस्थितियों का सामना करने के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है। प्रस्तावित स्टेशन परिसर आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम, उन्नत सीसीटीवी निगरानी, सोलर पैनल, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं इसका हिस्सा होंगी।

स्टेशन पुनर्विकास की खास विशेषताओं में विशाल फुट ओवरब्रिज भी शामिल है। करीब 72 मीटर चौड़े और 108 मीटर लंबे इस क्षेत्र में यात्रियों के लिए वेटिंग एरिया, दुकानें, माॅल और खान-पान की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। लगभग 60 हजार वर्गफुट का वाणिज्यिक क्षेत्र भी प्रस्तावित है।

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उद्देश्य यह है कि स्टेशन केवल रेल यात्रियों के आवागमन का स्थान न रहकर शहर के दोनों हिस्सों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सार्वजनिक केंद्र के रूप में विकसित हो।

इस मौके दैनिक जलतेदीप के महाप्रबंधक विनोद शर्मा ने मंडल रेल प्रबंधक ललित बोहरा को राजस्थानी मासिक माणक की प्रति भेंट की
इस मौके दैनिक जलतेदीप के महाप्रबंधक विनोद शर्मा ने मंडल रेल प्रबंधक ललित बोहरा को राजस्थानी मासिक माणक की प्रति भेंट की

इस मौके दैनिक जलतेदीप के महाप्रबंधक विनोद शर्मा ने मंडल रेल प्रबंधक ललित बोहरा को राजस्थानी मासिक माणक की प्रति भेंट की

पर्यावरण के अनुकूल और सोलर ऊर्जा

स्टेशन की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए ‘सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट’ और बायो-प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिससे उत्पन्न गैस का उपयोग रनिंग रूम आदि में किया जा सकेगा।

भविष्य की शहरी परिवहन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रेलवे स्टेशन को प्रस्तावित मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। स्काईवॉक के माध्यम से रेलवे और मेट्रो के बीच सुगम आवाजाही की व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है।

एआई सुरक्षा रोबोट ‘एएससी अर्जुन’

यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे द्वारा देश का पहला ‘एआई-आधारित’ सुरक्षा रोबोट ‘एएससी अर्जुन’ (असिस्टेंट सिक्युरिटी कमांडेंट) तैनात किया गया है। यह रोबोट राष्ट्रीय सुरक्षा डेटाबेस से जुड़ा है और भीड़ में भी अपराधियों/संदिग्धों के चेहरे पहचानकर तुरंत अलार्म बजा देता है।

बहुभाषी एआई पूछताछ प्रणाली

क्षेत्रीय और देश भर से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए एआई-संचालित बहुभाषी वॉयस-आधारित पूछताछ प्रणाली विकसित की गई है। यात्री अपनी भाषा में बोलकर ट्रेन के समय, प्लेटफार्म और गंतव्य से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं।

महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी जोर

रेलवे प्रशासन ने महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्यस्थल और सुरक्षा व्यवस्था पर भी जोर दिया है। महिला कर्मचारियों के लिए रेस्ट रूम की सुविधा तथा ट्रैक पर कार्य करने वाली महिला गैंगमेन के लिए बॉडी कैमरा जैसी व्यवस्थाएं सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

हाइजीनिक वेंडिंग व्यवस्था

ट्रेनों में खान-पान और चाय विक्रेताओं के लिए पीठ पर ले जाने वाले विशेष हाइजीनिक वाटर/टी केन (डिवाइस) का प्रारंभिक स्तर पर दो ट्रेनों में प्रयोग शुरू किया गया है, ताकि स्वच्छता बनी रहे और वेंडर्स का शारीरिक बोझ भी कम हो सके।

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अमृत भारत स्टेशन योजना और अन्य स्टेशन

​विशाखापट्टनम मंडल में ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत कुल 15 स्टेशनों का चयन किया गया है, जिनमें से 10 स्टेशन विशाखापट्टनम डिवीजन में आते हैं। इनमें सिम्हाचलम, बोब्बिली, दुव्वाडा, विजयनगरम, पलासा जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। दुव्वाडा और सिम्हाचलम स्टेशनों को सैटेलाइट/सबअर्बन टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

2028 तक पूरा करने का लक्ष्य

विशाखापट्टनम स्टेशन के व्यापक पुनर्विकास का लक्ष्य मई 2028 तक निर्धारित किया गया है। स्टेशन के एक हिस्से को इससे पहले तैयार करने की योजना है। इस पूरी परियोजना के पूरा होने के बाद विशाखापट्टनम स्टेशन की यात्री क्षमता, परिचालन दक्षता, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

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