स्व चिंतन से बुरे कर्मों से मुक्त होने की प्रेरणा मिलती है- डा.पदमचन्द्र महाराज

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चातुर्मास कार्यक्रम में प्रवचनों की सरिता बही

अखिल भारतीय स्थानक जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में चौरडिया भवन में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम में शनिवार को भी प्रवचनों की सरिता बही। श्रावकों ने इसका आध्यात्मिक लाभ उठाया।

धर्म सभा को संबोधित करते हुए पार्श्वचन्द्र महाराज के अंतेवासी डा. पदमचन्द्र महाराज ने आज कहा कि व्यक्ति को अपने कर्मों पर खुद चिन्तन करते रहना चाहिए। इससेे बुरे कर्मों से मुक्त होने की स्वप्रेरणा मिलती है। भगवान महावीर के 12 व्रतों की महिमा के बारे में मार्गदर्शन करते उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने जनकल्याण की भावना से 12 व्रतों की आचार संहिता बनाई है। यह आचार संहिता व्यक्ति को गलत राह पर जाने से रोकती है। समाज इन 12 व्रतों को अपने व्यवहार में उतार लें तो संसार में हर तरफ खुशहाली ही खुशहाली दिखाई देगी।

डॉ मुनि ने आज पांचवे व्रत परिग्रह परिमाण का विस्तृत विवेचन किया। उन्होंने कहा कि जो कार्य आप करते नहीं, आगे भी करनें वाले नहीं हैं, तो ऐसे कार्यों का पचक्खाण अवश्य करें। इससेे अनावश्यक पाप क्रियाओं से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि इच्छाओं पर काबू रखना चाहिए। इन्द्रिय विषयों में विकार उत्पन्न होने से विक्रति आती है।

इससे पूर्व महासति संवेग प्रभा ने कहा कि संसार में जन्म, बुढापा,रोग एवं मरण व्यक्ति के हाथ में नहीं है। इसमें बुढापा,रोग एवं मरण सबसे बड़े दुःख बताए गए हैं। मगर त्याग, तपस्या एवं धर्म से इन्हें हलका किया जा सकता है।

अखिल भारतीय स्थानक जयमल जैन श्रावक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवराज बोहरा तथा सचिव गौतम खिंवसरा ने बताया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावकों के जोधपुर आने का क्रम निरंतर जारी है। आज पीपाड़ सिटी निवासी दीपिका कांकरिया ने दस उपवास का पचक्खाण ग्रहण किया। उनकी माता श्रीमती मंजू भण्डारी ने उनका स्वागत किया। बोहरा ने बताया कि रविवार को बच्चों का संस्कार शिविर आयोजित किया जाएगा।

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