दर्शनावरणीय कर्म के उदय से आती है निद्रा : आचार्यश्री महाश्रमण

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आचार्यश्री महाश्रमण
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अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा गुरु सन्निधि में प्रदान किए गए पुरस्कार

विशेष प्रतिनिधि, छापर (चूरू)। अपने आठवें गुरु आचार्य कालूगणी की जन्मधरा छापर में वर्ष 2022 का चतुर्मास कर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें आचार्य, महातपस्वी श्री महाश्रमणजी ने श्रद्धालुओं को भगवती सूत्र आगम के माध्यम से संतुलित निद्रा लेने की प्रेरणा प्रदान की। साथ ही आचार्यश्री ने कालूयशोविलास के आख्यान क्रम को भी आगे बढ़ाया। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद ने युवा गौरव अलंकरण सहित आचार्य महाप्रज्ञ प्रतिभा पुरस्कार व आचार्य महाश्रमण युवा व्यक्तित्व पुरस्कार प्रदान किये। इस संदर्भ में भी आचार्यश्री ने पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को मंगल प्रेरणा प्रदान की।

गुरुवार को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि भगवती सूत्र में प्रश्न किया गया कि जो छदमस्थ होते हैं, वे नींद लेते हैं क्या? उत्तर दिया गया हां, छदमस्थ नींद लेते हैं। पुन: प्रश्न किया गया कि क्या केवली भी नींद लेते हैं? उत्तर दिया गया कि नहीं, केवली नींद नहीं लेते हैं। प्रतिप्रश्न किया गया कि ऐसा किस कारण से होता है? उत्तर प्रदान करते हुए बताया गया कि तात्त्विक दृष्टि से नींद दर्शनावरणीय कर्म के उदय से आती है। छदमस्थ प्राणी के दर्शनावरणीय कर्म का उदय होता है तो उन्हें नींद आती है और केवली का दर्शनावरणीय कर्म क्षय हो चुका होता है, इसलिए उन्हें निद्रा नहीं आती। नींद प्राणी के जीवन का महत्त्वपूर्ण अंग है। भगवान महावीर ने भी अपने साधना काल के दौरान नींद ली थी।

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आदमी को निद्रा विजय की दिशा में आगे बढऩे का प्रयास करना चाहिए। नींद के संदर्भ में आदमी को यह ध्यान देना चाहिए कि नींद कैसे ले रहा है। यदि कोई साधना की दृष्टि से नींद का प्रतिरोध करे तो अच्छी बात है, किन्तु आदमी का प्रयास यह होना चाहिए कि समय से सो जाए और समय से जग जाए। नींद अच्छे ढंग से ले लेने से कार्य भी अच्छा हो सकेगा। समय के साथ नींद आए अथवा ली जाए तो आदमी का कार्य व्यवस्थित हो सकता है। आदमी रात्रि में अपने कार्यों से निवृत्त होकर जल्दी सोए और सुबह सूर्योदय से एक-डेढ़ घंटे पूर्व निद्रा का त्याग कर बिस्तर को छोड़ दे तो एक अच्छा क्रम हो सकता है। प्रवचन के संदर्भ में मुनि वर्धमानकुमारजी ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी जिज्ञासा प्रस्तुत की तो आचार्यश्री ने उनकी जिज्ञासा को भी समाहित किया। आचार्यश्री ने कालूयशोविलास के आख्यान क्रम को भी आगे बढ़ाया। आचार्य कालूगणी की जन्मभूमि पर राजस्थानी भाषा में कालूयशोविलास का आख्यान जन-जन को आह्लादित करने वाला है। कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा अलंकरण-पुरस्कार प्रदान करने का उपक्रम भी रहा।

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इस संदर्भ में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष पंकज डागा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। अभातेयुप के पदाधिकारियों द्वारा वर्ष 2022 के युवा गौरव अलंकरण के लिए संजय जैन को, आचार्यश्री महाप्रज्ञ प्रतिभा पुरस्कार राजीव सुराणा, आचार्य महाश्रमण युवा व्यक्तित्व पुरस्कार श्री देवेन्द्र डागलिया को प्रदान किया गया। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं के प्रशस्ति-पत्र का वाचन क्रमश: अभातेयुप के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश डागा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयेश नाहटा व सहमंत्री भूपेश कोठारी ने किया। तीनों पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। इस संदर्भ में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि योगेशकुमारजी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

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