ईस्ट बंगाल को राष्ट्रपति भवन में मिली बड़ी ट्रॉफी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में डूरंड कप-2026 की विजेता ईस्ट बंगाल फुटबॉल क्लब को प्रेसिडेंट्स कप ट्रॉफी सौंपी। अगस्त में खेले गए फाइनल में ईस्ट बंगाल ने मोहन बागान सुपर जायंट को 4-1 से हराकर 17वीं बार डूरंड कप जीता था। इस जीत के साथ क्लब ने सबसे ज्यादा खिताब के रिकॉर्ड की बराबरी की।
- ईस्ट बंगाल: डूरंड कप 2026 का विजेता क्लब बना।
- डूरंड कप: ईस्ट बंगाल ने 17वीं बार प्रतिष्ठित खिताब जीता।
- राष्ट्रपति मुर्मू: राष्ट्रपति भवन में विजेता टीम को प्रेसिडेंट्स कप ट्रॉफी सौंपी।
East Bengal Honored with President’s Cup : डूरंड कप की जीत के बाद ईस्ट बंगाल के खिलाड़ियों को सोमवार को एक और खास सम्मान मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में क्लब को प्रेसिडेंट्स कप ट्रॉफी प्रदान की। इस मौके पर भारतीय सेना और डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसाइटी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, थलसेना प्रमुख और डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसाइटी के अध्यक्ष जनरल धीरज सेठ, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन शामिल रहे। ईस्ट बंगाल के खिलाड़ी और टूर्नामेंट सोसाइटी के पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
ईस्ट बंगाल ने अगस्त में विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में खेले गए 135वें डूरंड कप के फाइनल में मोहन बागान सुपर जायंट को 4-1 से मात दी थी। मुकाबले में ईस्ट बंगाल ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और पहले हाफ में चार गोल दागकर मैच पर मजबूत पकड़ बना ली।
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थ्लिबाम बिपिन सिंह ने 10वें मिनट में टीम का खाता खोला। इसके दो मिनट बाद एडमंड लालरिंदिका ने गोल कर बढ़त दोगुनी कर दी। एडमंड यहीं नहीं रुके और उन्होंने 22वें तथा 44वें मिनट में भी गोल किए। इस तरह उन्होंने फाइनल में हैट्रिक पूरी की।
मोहन बागान की ओर से मनवीर सिंह ने 33वें मिनट में एक गोल जरूर किया, लेकिन टीम मुकाबले में वापसी नहीं कर सकी। इस खिताबी जीत के साथ ईस्ट बंगाल ने डूरंड कप इतिहास में अपना 17वां खिताब हासिल किया। क्लब ने सबसे ज्यादा डूरंड कप जीतने के मामले में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान की बराबरी कर ली है।
ईस्ट बंगाल के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि फाइनल में उसने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ एकतरफा अंदाज में मुकाबला अपने नाम किया।
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डूरंड कप का आयोजन वर्ष 1888 से हो रहा है। तीनों सेनाओं की ओर से आयोजित यह प्रतियोगिता दुनिया के सबसे पुराने जीवित फुटबॉल टूर्नामेंटों में तीसरे स्थान पर है। भारत में इसे सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिताओं में गिना जाता है। यह टूर्नामेंट सिर्फ स्थापित खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि युवा फुटबॉल प्रतिभाओं और सर्विसेज टीमों के लिए भी अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा मंच है।
डूरंड कप के 135वें संस्करण में कुल 24 टीमों ने हिस्सा लिया था। इनमें श्रीलंका की सशस्त्र सेनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली एक विदेशी टीम भी शामिल रही। इस भागीदारी के साथ टूर्नामेंट ने भारतीय क्लबों, सर्विसेज टीमों और अंतरराष्ट्रीय टीमों को एक साझा मंच देने की अपनी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया।



