स्क्वैश में भारत के दो रजत

आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारतीय स्क्वैश खिलाड़ियों ने रविवार को दो रजत पदक अपने नाम किए। अभय सिंह और अनाहत सिंह ने एकल स्पर्धाओं के फाइनल तक पहुंचकर भारत की पदक उम्मीदें बढ़ाईं, लेकिन दोनों को मलेशियाई खिलाड़ियों के खिलाफ हार मिली। अभय को एनग ईन यो और अनाहत को सिवसांगरी सुब्रमण्यम ने हराकर स्वर्ण जीता।

  • स्क्वैश में भारत: अभय सिंह और अनाहत सिंह ने एकल में रजत पदक जीते।
  • अभय सिंह: एनग ईन यो से 9-11, 5-11, 5-11 से हारकर रजत हासिल किया।
  • अनाहत सिंह: सिवसांगरी सुब्रमण्यम के खिलाफ फाइनल में हार के बाद रजत पदक जीता।

India Wins Two Squash Silvers : एशियाई खेलों में भारतीय स्क्वैश के लिए रविवार का दिन पदकों से भरा रहा। अभय सिंह और अनाहत सिंह ने पुरुष एवं महिला एकल में रजत पदक जीतकर भारत की झोली में दो और पदक जोड़े। दोनों खिलाड़ी फाइनल में मलेशिया के प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला कर रहे थे।

पुरुष एकल के फाइनल में अभय सिंह को मलेशिया के एनग ईन यो ने सीधे तीन गेम में 11-9, 11-5, 11-5 से हराया। अभय ने मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन मलेशियाई खिलाड़ी ने महत्वपूर्ण मौकों पर नियंत्रण बनाए रखा और खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ईन यो ने एशियाई खेलों में अपना पुरुष एकल खिताब बरकरार रखा।

अभय ने फाइनल से पहले पाकिस्तान के मुहम्मद इरफान को सेमीफाइनल में 11-3, 12-10, 11-6 से हराकर स्वर्ण पदक मुकाबले में जगह बनाई थी। वह एशियाई खेलों के पुरुष एकल में भारत के लिए स्वर्ण हासिल नहीं कर सके, लेकिन रजत के साथ लौटे।

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महिला एकल में 18 वर्षीय अनाहत सिंह को मलेशिया की सिवसांगरी सुब्रमण्यम के खिलाफ 0-3 से हार का सामना करना पड़ा। सिवसांगरी ने मुकाबला अपने नाम कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि अनाहत को रजत से संतोष करना पड़ा।

फाइनल तक अनाहत का सफर खास रहा। सेमीफाइनल में उन्होंने जापान की सातोमी वातानाबे के खिलाफ पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की थी। उन्होंने यह मुकाबला 9-11, 11-13, 12-10, 11-6, 11-3 से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया था।

अभय और अनाहत के फाइनल में पहुंचने के साथ ही भारत ने पहली बार एशियाई खेलों की स्क्वैश एकल स्पर्धाओं में एक साथ पुरुष और महिला दोनों वर्गों में फाइनलिस्ट उतारे थे।

भारत को स्क्वैश में इससे पहले जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार की मिश्रित युगल जोड़ी ने कांस्य पदक दिलाया था। इस तरह इस खेल में भारत की पदक झोली और मजबूत हुई।

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