खेलों को नई उड़ान देने की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत में 21वीं सदी के अनुरूप आधुनिक खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा रहा है। प्रतिभाओं की पहचान से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ के जरिए युवाओं को देश की खेल यात्रा और भविष्य की योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
- केन्द्र सरकार: आधुनिक खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर जोर।
- खेलो इंडिया डायलॉग: युवाओं की आकांक्षाओं और खेल प्रतिभाओं को मंच देने की पहल।
- प्रधानमंत्री मोदी: ओलंपिक के अधिक से अधिक खेलों में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर जोर।
PM Modi Pushes Modern Sports Ecosystem : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार देश में ऐसा आधुनिक खेल तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें युवा प्रतिभाओं को शुरुआत से ही सही दिशा और जरूरी सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि खेल विश्वविद्यालयों से लेकर आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों तक एक मजबूत व्यवस्था तैयार की जा रही है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल खेलों पर चर्चा करने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद खिलाड़ियों और युवाओं की सोच, सपनों और आकांक्षाओं को देश के विकास के व्यापक लक्ष्य से जोड़ना भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल व्यक्ति को केवल जीतना नहीं सिखाता, बल्कि बेहतर तरीके से मुकाबला करना और चुनौतियों का सामना करना भी सिखाता है। उनके मुताबिक, स्वस्थ समाज में खेल भावना जरूरी है और इसे वास्तविक रूप से विकसित करने के लिए मैदान पर उतरना महत्वपूर्ण है।
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मोदी ने प्रतिभा खोज अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि 5 से 15 वर्ष के बच्चों की क्षमताओं को पहचानने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ बच्चे की पसंद जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि उसकी क्षमता और स्वभाव के लिए कौन-सा खेल सबसे उपयुक्त है। इसके बाद उसी आधार पर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रतिभा पहचान से लेकर खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के सफर में हर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। खेल विज्ञान, प्रशिक्षण तकनीक और दूसरे देशों के अनुभवों को साझा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय खेलों के सामने मौजूद एक बड़ी चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भारत अभी ओलंपिक के लगभग आधे खेलों में ही हिस्सा लेता है। सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग जैसे खेलों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास बेहतर जनसांख्यिकीय और भौगोलिक संभावनाएं हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में देश की भागीदारी को और मजबूत करने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास ऐसे खेलों के लिए भी मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है, ताकि आने वाले समय में भारतीय खिलाड़ी अधिक से अधिक खेल विधाओं में दुनिया के सामने अपनी क्षमता दिखा सकें।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने 29 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं दीं और महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को याद किया। उन्होंने बताया कि करीब 100 वर्ष पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम न्यूजीलैंड दौरे पर गई थी, जिसमें मेजर ध्यानचंद भी शामिल थे। इस दौरे को भारत और न्यूजीलैंड के खेल संबंधों के ऐतिहासिक आधार से जोड़कर देखा जाता है।



