21 प्रतिभाओं का सम्मान, पंडित सतीश उपाध्याय ने दिया सेवा का संदेश
शाहपुरा बाग में आयोजित सम्मान समारोह में समाज सेवा और जीव-दया के क्षेत्र में योगदान देने वाली 21 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुक्ति दया आश्रम और ‘चहचाहट’ संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रतिभाओं को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। समारोह में पक्षी सेवा, प्रकृति संरक्षण और आध्यात्मिक मूल्यों को लेकर भी लोगों से अपील की गई।
- 21 प्रतिभाओं का सम्मान समाज सेवा में योगदान के लिए किया गया।
- पक्षी सेवा और जीव-दया को लेकर लोगों से आगे आने की अपील।
- पंडित सतीश उपाध्याय ने तनाव से राहत के लिए आध्यात्मिक साहित्य से जुड़ने का संदेश दिया।
21 Social Service Contributors Honoured in Jaipur : जयपुर के शाहपुरा बाग में आयोजित एक विशेष समारोह में समाज सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। मुक्ति दया आश्रम और पक्षी सेवा संस्था ‘चहचाहट’ के संयुक्त आयोजन में 21 प्रतिभाओं को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।

समारोह में मुक्ति दया आश्रम के संस्थापक पंडित सतीश उपाध्याय, ‘चहचाहट’ के संस्थापक एवं जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र मोहन माथुर तथा संस्था के सह-संस्थापक डॉ. पी.सी. जैन ने सम्मान प्रदान किया।
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समारोह में पंडित सतीश उपाध्याय ने लोगों से जीवन की परेशानियों के बीच सकारात्मक सोच बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और मानसिक परेशानियां बढ़ रही हैं। ऐसे में धार्मिक और आध्यात्मिक साहित्य व्यक्ति को शांति के साथ कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने की प्रेरणा दे सकता है।
भावुक अंदाज में उन्होंने कहा, “अपने दुख मुझे दो और आशीर्वाद लेकर यहां से जाओ।” उन्होंने लोगों से साल में कम से कम एक बार तुलादान करने और अपने वजन के बराबर अनाज पक्षियों को खिलाने का आग्रह भी किया।
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‘चहचाहट’ संस्था के संस्थापक देवेंद्र मोहन माथुर ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 31 वर्षों से हर शनिवार जयगढ़ की पहाड़ियों में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पक्षियों की सेवा केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण और जीव-दया के कार्यों में भागीदारी बढ़ाने की अपील की।
पूर्व प्राचार्य राधेश्याम शर्मा ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जीवन में कुछ दुर्गुणों से दूरी बनाकर व्यक्ति अधिक शांत और संतुलित जीवन जी सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने देश के एकमात्र शब्द ब्रह्म मंदिर का भी अवलोकन किया।
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मंच संचालन वेना गुप्ता और भुवनेश माथुर ने किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में किशोर माईश्वरी, आशीष खंडेलवाल और एडवोकेट श्रेयस मिश्रा का सहयोग रहा।
समाज सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए अरुण जोशी, नीना पारीक, मनोज अरोड़ा, मीना पारीक, गीता पारीक, ऋतुराज मीणा, सुनील टहलियानी, राधेश्याम शर्मा, रमेश कुमावत, अजीत सिंह, चंद्रप्रकाश शर्मा, सुरेंद्र कुमार सोनी, रेनू वशिष्ठ, विनोद जैन लोहिया, गोपाल गुप्ता, पंकज पांचाल, देवकरण शर्मा, संतोष मेढ़ना, सिम्मी खोवाला, कुसुम लता जैन, राकेश गोदिका, दिलीप चौधरी और सतीश पारीक को सम्मानित किया गया।
समारोह का मुख्य संदेश समाज सेवा, जीव-दया और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन का हिस्सा बनाने पर केंद्रित रहा। आयोजकों ने कहा कि ऐसे सम्मान समाजहित में लगातार काम करने वाले लोगों का उत्साह बढ़ाने के साथ दूसरों को भी सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।



