जोधपुर एम्स के स्थापना दिवस पर मुख्य सचिव ने दिया बड़ा बयान, 10 साल के विजन से बदलेगी तस्वीर
एम्स जोधपुर के फाउंडेशन डे समारोह में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने संस्थान को मेडिकल रिसर्च, क्लिनिकल एक्सीलेंस और चिकित्सा शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाने का विजन सामने रखा। उन्होंने डिजिटल हेल्थ, आधुनिक तकनीक, मजबूत टीम, मरीजों के अनुकूल सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को अगले दशक की प्राथमिकता बताया। साथ ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया।
- मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रस्तुत किया एम्स जोधपुर का 10 वर्षीय विजन प्लान।
- डिजिटल हेल्थकेयर और एआई के जरिए पेशेंट-फ्रेंडली सुविधाओं को विस्तार देने पर जोर।
- फाउंडेशन डे पर एम्स को मेडिकल रिसर्च और क्लिनिकल एक्सीलेंस का ग्लोबल हब बनाने का संकल्प।
Chief Secretary makes a major statement on the foundation day of AIIMS Jodhpur : एम्स जोधपुर के फाउंडेशन डे समारोह में संस्थान के अगले 10 वर्षों की दिशा को लेकर विस्तृत विजन सामने रखा गया। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि एम्स को चिकित्सा अनुसंधान, क्लिनिकल एक्सीलेंस और मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े स्वास्थ्य संस्थान की मजबूती केवल आधुनिक भवनों से नहीं होती, बल्कि बेहतर टीम, प्रभावी सिस्टम, तकनीक और मरीजों के अनुभव से उसकी पहचान बनती है। इसी सोच के साथ एम्स जोधपुर को और मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सुविधाओं और विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से देश में स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता लगातार बढ़ रही है। अगले दशक में एम्स जोधपुर को विश्वस्तरीय संस्थान के रूप में विकसित करने के लिए गुणवत्ता और पेशेंट फ्रेंडली केयर को केंद्र में रखना होगा।
1,000 बेड का संस्थान, रोजाना हजारों मरीजों को सेवा
श्रीनिवास ने एम्स जोधपुर की अब तक की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2012 में स्थापित यह संस्थान राजस्थान में उन्नत और विशिष्ट चिकित्सा सेवाओं के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है।
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उन्होंने बताया कि करीब 1,000 बेड वाले एम्स जोधपुर में प्रतिदिन लगभग 6,000 मरीज ओपीडी सेवाओं का लाभ लेते हैं, जबकि 250 से अधिक मरीजों को रोजाना आपातकालीन सेवाएं मिलती हैं। संस्थान ने बाल चिकित्सा हृदय शल्य चिकित्सा, TAVI, ECMO, बोन मैरो और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट तथा IVF जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता विकसित की है।
डिजिटल हेल्थ से बदलेंगे मरीजों के अनुभव
मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल बदलाव की संभावनाओं पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल हॉस्पिटल सिस्टम, आपस में जुड़ी प्रयोगशालाओं और तकनीक आधारित मरीज सेवाओं को भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अहम बताया।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में AI, डिजिटल थेरेप्यूटिक्स और रिमोट पेशेंट मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल आने वाले समय में सेवाओं की पहुंच, दक्षता और गुणवत्ता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
क्लिनिकल एक्सीलेंस को बेहतर करने के लिए OPD व्यवस्था को व्यवस्थित करने, एक यूनिक हेल्थ आइडेंटिटी के तहत मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल करने, इमरजेंसी ट्राइएज को मजबूत करने और मल्टी-डिसिप्लिनरी केयर को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
रिसर्च में जीनोमिक्स और AI पर फोकस
एम्स के 10-वर्षीय विजन में मेडिकल रिसर्च को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। श्रीनिवास ने जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में वैश्विक संस्थानों के साथ रिसर्च सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई।
उन्होंने इंटर-सब्जेक्ट रिसर्च, ग्लोबल रिसर्च फेलोशिप, मजबूत क्लिनिकल रिसर्च ग्रुप और बायोरिपोजिटरी विकसित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि उच्च प्रभाव वाले चिकित्सा अनुसंधान के जरिए एम्स जोधपुर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दृश्यता और मजबूत की जा सकती है।
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मेडिकल शिक्षा में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर
मुख्य सचिव ने मेडिकल एजुकेशन को भी विजन का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने पाठ्यक्रम की नियमित समीक्षा के साथ व्यावहारिक और सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने वैश्विक विशेषज्ञों के साथ संवाद, क्लिनिकल केस डिस्कशन और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य प्रोफेशनल्स को संस्थान से लंबे समय तक जोड़कर रखने के लिए बेहतर कार्य वातावरण, मजबूत प्रशासन और प्रभावी निर्णय प्रक्रिया विकसित करने पर जोर दिया।
मजबूत टीम और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी
श्रीनिवास ने कहा कि किसी संस्थान को मजबूत बनाने के लिए समय पर भर्ती और सक्षम टीम सबसे जरूरी आधारों में शामिल हैं। उन्होंने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पारदर्शी खरीद व्यवस्था, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए बेहतर आवासीय सुविधाओं तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में लगातार काम होना चाहिए। क्लिनिकल क्षेत्रों में बेहतर सहायता सुविधाएं और मरीज केंद्रित व्यवस्था अस्पताल के अनुभव को बदल सकती है।
मेडिकल शिक्षा का हुआ तेजी से विस्तार
मुख्य सचिव ने देश में मेडिकल एजुकेशन के विस्तार के आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार 2014 में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 181 थी, जो 2026 में बढ़कर 441 हो गई है। देश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या अब 823 तक पहुंच गई है।
इसी अवधि में स्नातक मेडिकल सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,36,939 और पोस्ट ग्रेजुएट सीटें 31,185 से बढ़कर 86,360 हो गई हैं।
नागरिक केंद्रित सेवाओं से जुड़े प्रशासनिक सुधार
समारोह में श्रीनिवास ने राजस्थान में प्रशासनिक सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में शासन व्यवस्था को नागरिक केंद्रित सेवा वितरण, तकनीक आधारित शिकायत निवारण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में तकनीक और AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
फाउंडेशन डे कार्यक्रम के समापन पर मुख्य सचिव ने कहा कि एम्स जोधपुर के संस्थागत विकास और बेहतर शासन व्यवस्था से बड़ी आबादी को उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने संस्थान की निरंतर प्रगति और सफलता की कामना करते हुए अगले दशक के विजन को जमीन पर उतारने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।



