AI से बदलेगी खेती, किसानों को मिलेंगी स्मार्ट सेवाएं

राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित तकनीक से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को वाधवानी एआई विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। फसल, मौसम, सिंचाई, कीट नियंत्रण और बीमा दावों से लेकर बाजार जानकारी तक AI के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। किसानों को स्थानीय और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

  • पंत कृषि भवन में वाधवानी AI द्वारा 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण।
  • राज किसान पोर्टल और AI तकनीक से मौसम, फसल रोग और बाजार भाव की सटीक जानकारी मिलेगी।
  • आपदा प्रबंधन से लेकर फसल बीमा के दावों का त्वरित और वैज्ञानिक तरीके से होगा निस्तारण।

AI will transform agriculture, farmers will get smart services : राजस्थान में कृषि व्यवस्था को तकनीक आधारित और अधिक किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में सरकार ने AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर जोर बढ़ाया है। कृषि विभाग की ओर से पंत कृषि भवन में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को Wadhwani Institute for Artificial Intelligence के विशेषज्ञों ने AI के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी।

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कार्यशाला का उद्देश्य केवल अधिकारियों को नई तकनीक से परिचित कराना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि AI और Data Analytics का इस्तेमाल कृषि प्रशासन, योजना निर्माण, निगरानी और किसान सेवाओं को बेहतर बनाने में किस तरह किया जा सकता है। विभाग अब AI को प्रयोग तक सीमित रखने के बजाय कृषि व्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

खेत से बाजार तक तकनीक का इस्तेमाल

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि AI का फायदा केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका वास्तविक लाभ तब होगा, जब तकनीक खेत तक पहुंचे और किसान को सही समय पर उपयोगी जानकारी मिले। बुवाई से लेकर कटाई और फिर उपज के बाजार तक पहुंचने की प्रक्रिया में AI आधारित सेवाएं किसानों की मदद कर सकती हैं।

AI से बदलेगी खेती, किसानों को मिलेंगी स्मार्ट सेवाएं
Image Source : Via DIPR

मौसम के आधार पर खेती की सलाह, फसल की स्थिति की निगरानी, कीट और रोगों की शुरुआती पहचान, संभावित उत्पादन का अनुमान, सिंचाई प्रबंधन और बाजार से जुड़ी जानकारी जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इससे किसानों को परिस्थितियों के अनुसार समय पर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

मौसम और फसल का डेटा देगा बेहतर सलाह

कृषि और मौसम से जुड़े बड़े आंकड़ों का AI और Data Analytics के जरिए विश्लेषण कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सलाह तैयार की जा सकती है। इससे बुवाई, सिंचाई, उर्वरक उपयोग, कीट नियंत्रण और कटाई जैसे कामों को लेकर किसान को समय पर जानकारी मिल सकेगी।

फसल की नियमित निगरानी के साथ बीमारी या कीट के शुरुआती संकेतों की पहचान भी तकनीक के जरिए संभव हो सकती है। संभावित उपज का अनुमान मिलने से कृषि योजना बनाने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में भी मदद मिल सकती है।

फसल बीमा में तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में भी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फसल क्षति के आकलन के लिए रिमोट सेंसिंग, इमेज एनालिटिक्स, ड्रोन और अन्य डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऐसी व्यवस्था से प्राकृतिक आपदा के बाद फसल नुकसान का आकलन अधिक वैज्ञानिक तरीके से करने, दावों के निस्तारण और योजना की निगरानी में मदद मिल सकती है। विभाग का जोर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर है।

Raj Kisan Portal होगा ज्यादा स्मार्ट

किसानों को योजनाओं और कृषि सेवाओं से जोड़ने वाले Raj Kisan Portal को भी AI आधारित तकनीक से और सक्षम बनाने की तैयारी है। किसान की फसल, क्षेत्र और जरूरत से जुड़ी जानकारी के आधार पर उसे संबंधित योजनाओं और सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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AI की मदद से आवेदन, सेवा वितरण, लंबित मामलों और संभावित समस्याओं की पहचान भी आसान हो सकती है। इससे किसान को उसकी जरूरत के अनुसार जानकारी और सेवाएं उपलब्ध कराने की One-to-One Farmer Service Delivery व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

तैयार होगा AI आधारित कृषि प्रशासन

कृषि विभाग AI आधारित परियोजनाओं और तकनीकी समाधानों के विकास, परीक्षण और विस्तार के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करने पर भी काम कर रहा है। इसके जरिए विभाग, तकनीकी संस्थानों, शोध संगठनों, विशेषज्ञों और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य राजस्थान की स्थानीय कृषि चुनौतियों के अनुसार व्यावहारिक तकनीकी समाधान तैयार करना है। साथ ही Artificial Intelligence, Machine Learning और Data Analytics आधारित नवाचारों को कृषि क्षेत्र में बढ़ावा देने की योजना है।

किसानों को केंद्र में रखकर होगा तकनीकी बदलाव

विभाग का कहना है कि AI का इस्तेमाल केवल सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ाने के लिए नहीं किया जाएगा। किसान को इस तकनीकी बदलाव के केंद्र में रखने पर जोर रहेगा। स्थानीय भाषा और जरूरत के मुताबिक मौसम, फसल, कीट, बीमारी, सरकारी योजनाओं और बाजार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना इसका प्रमुख हिस्सा होगा।

तकनीक का फायदा जमीन तक पहुंचाने के लिए किसानों और ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की डिजिटल क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य ऐसी सेवाएं विकसित करना है, जिन्हें किसान आसानी से समझ सके और अपने खेत में इस्तेमाल कर सके।

38 संगठनों के साथ साझेदारी

राजस्थान कृषि विभाग ने आधुनिक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए कुल 38 संगठनों के साथ MoU किए हैं। इनमें TAFE-JFarm Services, Manipal University, Wadhwani AI, रामशान्ताय जैविक कृषि एवं प्रशिक्षण केंद्र, National Institute of Agricultural Marketing (NIAM), 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप और 20 प्रतिष्ठित Civil Society Organisations शामिल हैं।

इन साझेदारियों के जरिए प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार और आधुनिक तकनीकों के प्रसार पर काम किया जाएगा। सभी संगठन एक साझा मंच पर मिलकर कार्य करेंगे और प्रत्येक तिमाही में प्रगति की समीक्षा की जाएगी। जिला स्तर पर सेमिनार भी आयोजित होंगे, जिनमें जिला प्रशासन की भागीदारी रहेगी।

छोटे किसानों और युवाओं को भी मिलेगा फायदा

MoU के तहत किसानों को प्राकृतिक और जलवायु अनुकूल खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण देने के साथ प्रदर्शन प्लॉट, तकनीकी मार्गदर्शन और किसान समूहों के गठन पर काम किया जाएगा। जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन से जुड़ी सहायता देने की भी योजना है।

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छोटे एवं सीमांत किसान, महिला किसान, युवा किसान और जनजातीय क्षेत्रों के कृषकों को इन पहलों से जोड़ने पर विशेष ध्यान रहेगा। विभाग के अनुसार, तकनीक, डेटा, AI और बेहतर प्रशासन के तालमेल से राजस्थान में ऐसा कृषि तंत्र विकसित करने का लक्ष्य है, जो किसानों को अधिक त्वरित, पारदर्शी और जरूरत आधारित सेवाएं उपलब्ध करा सके।

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