‘रिंग में उतरते ही दर्द भूल जाती हूं’… कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट अरुंधति चौधरी ने बांटी सफलता की मूलमंत्र

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 70 किलो महिला बॉक्सिंग का स्वर्ण जीतने वाली कोटा की अरुंधति चौधरी ने छात्रों से सफलता के लिए लगातार खुद को बेहतर बनाने का मंत्र साझा किया। उन्होंने चोट, असफलता और संघर्ष के दौर के अनुभव बताए। अरुंधति ने कहा कि सही रणनीति, कोच पर भरोसा और कठिन परिस्थितियों में हिम्मत बनाए रखना जरूरी है।

  • अरुंधति चौधरी ने छात्रों को सफलता के टिप्स दिए।
  • बॉक्सिंग में चोट और संघर्ष के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
  • 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में गोल्ड जीतना उनका लक्ष्य है।

‘I forget the pain the moment I step into the ring.’ : रिंग में जीत के लिए सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि सही रणनीति और मानसिक मजबूती भी जरूरी होती है। कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में 70 किलोग्राम महिला बॉक्सिंग में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली कोटा की अरुंधति चौधरी ने शुक्रवार को मोशन एजुकेशन के द्रोणा-2 कैंपस में छात्रों से बातचीत के दौरान सफलता का यही मंत्र साझा किया।

'रिंग में उतरते ही दर्द भूल जाती हूं'... कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट अरुंधति चौधरी ने बांटी सफलता की मूलमंत्र
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

अरुंधति ने छात्रों से कहा कि लक्ष्य बड़ा रखने से ज्यादा जरूरी है, उसके लिए हर दिन खुद पर काम करना। उन्होंने कहा कि पढ़ाई हो या खेल, अच्छे परिणाम के लिए लगातार सुधार करते रहना चाहिए। कोच की सलाह पर भरोसा रखने के साथ समय और परिस्थिति के अनुसार अपनी तकनीक व रणनीति में बदलाव भी जरूरी है।

'रिंग में उतरते ही दर्द भूल जाती हूं'... कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट अरुंधति चौधरी ने बांटी सफलता की मूलमंत्र
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अपने करियर के संघर्ष का जिक्र करते हुए अरुंधति ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया, जब लगातार मुश्किलें सामने थीं। वे ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकीं और ट्रेनिंग के दौरान गंभीर चोट लगने के बाद करीब एक महीने अस्पताल में रहना पड़ा। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अभ्यास और प्रयास जारी रखा।

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अरुंधति ने बताया कि पिछले कुछ समय में उनकी मेहनत का नतीजा लगातार अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदकों के रूप में सामने आया है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि असफलता किसी यात्रा का अंत नहीं होती, बल्कि उससे सीख लेकर दोबारा तैयारी करना ही असली चुनौती है।

15 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की

अरुंधति ने बताया कि उनका खेल सफर बास्केटबॉल से शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने वुशु में हाथ आजमाया और चैंपियनशिप भी जीती। आखिरकार 15 साल की उम्र में उन्होंने बॉक्सिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया।

शुरुआत के दिनों में कोटा में पेशेवर बॉक्सिंग कोच की सुविधा नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उन्होंने छात्रों से कहा कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कई बार सोच-समझकर जोखिम लेना पड़ता है।

ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि तेज बुखार के बावजूद उन्होंने मुकाबले में उतरने का फैसला किया। 102 डिग्री बुखार के बीच रिंग में उतरीं अरुंधति ने 5-0 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात अक्सर इंसान को उसकी वास्तविक क्षमता का एहसास कराते हैं। इसलिए परिस्थिति चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण हो, हिम्मत नहीं छोड़नी चाहिए।

‘रिंग के नौ मिनट ही सबसे अहम’

अपनी चोटों को लेकर पूछे गए सवाल पर अरुंधति ने बताया कि करीब नौ साल के बॉक्सिंग करियर में शायद ही कोई ऐसा साल रहा हो, जब वे चोट से दूर रही हों। टखने में स्ट्रेस फ्रैक्चर से लेकर घुटने की एसीएल चोट तक का सामना उन्होंने किया है।

उन्होंने कहा कि रिंग में उतरने के बाद उनके लिए सिर्फ मुकाबले के नौ मिनट महत्वपूर्ण होते हैं। उन कुछ मिनटों के लिए महीनों की तैयारी होती है। रिंग में पहुंचने के बाद उनका ध्यान दर्द पर नहीं, बल्कि देश के तिरंगे और जीत पर रहता है।

अरुंधति ने मंगोलिया में हुई एशियन चैंपियनशिप का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट की पहली ही फाइट में चोट लग गई थी, लेकिन उन्होंने दर्द को नजरअंदाज करते हुए मुकाबला जारी रखा।

अब नजर 2028 ओलंपिक पर

अरुंधति ने कहा कि पिछले चार साल उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। सर्जरी, चोट और मानसिक दबाव के बीच खुद को संभालना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने वापसी की और पिछले सात महीनों में लगातार पांच अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने में सफलता हासिल की।

अब उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक है। उन्होंने कहा कि अभी भी कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है और इसके लिए कैंप में कोच के साथ अपनी कमियों पर काम करेंगी।

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पिछले ओलंपिक क्वालीफिकेशन के दौरान मां की बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों का असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा था। इस बार वे उस अनुभव को पीछे छोड़कर पूरी तैयारी के साथ उतरना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि 2027 से ओलंपिक क्वालीफायर शुरू होंगे और उनका लक्ष्य भारत के लिए ओलंपिक स्वर्ण जीतना है।

कार्यक्रम में मोशन एजुकेशन के फाउंडर एवं एजुकेटर नितिन विजय, चेयरमैन सुरेंद्र विजय, डायरेक्टर सुशीला विजय, डॉ. स्वाति विजय और अरुंधति की मां सुनीता चौधरी मौजूद रहीं। नितिन विजय और छात्रों ने अरुंधति से कई सवाल किए, जिनका उन्होंने खुलकर जवाब दिया।

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