EWS पर भाटी का अभियान तेज, 26 सितंबर से यात्रा

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने EWS व्यवस्था को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की मांग उठाई है। उन्होंने पात्रता, प्रमाण-पत्र, आयुसीमा, आवेदन शुल्क, आय निर्धारण और शैक्षणिक सुविधाओं में बदलाव का प्रस्ताव रखा। भाटी ने राज्य के EWS प्रमाण-पत्र को केंद्रीय सेवाओं में मान्यता देने और पंचायती राज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की मांग भी रखी।

  • EWS पात्रता में जमीन की उत्पादकता और स्थानीय परिस्थितियां शामिल करने की मांग।
  • EWS प्रमाण-पत्र को केंद्र में मान्यता देने और वैधता बढ़ाने का प्रस्ताव।
  • EWS यात्रा के जरिए आयुसीमा, शिक्षा और प्रतिनिधित्व के मुद्दे उठाए जाएंगे।

Bhati’s campaign on EWS intensifies : आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS की व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अपना अभियान तेज कर दिया है। बाड़मेर के आलोक आश्रम में पत्रकार वार्ता और सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने EWS पात्रता से लेकर प्रमाण-पत्र, आयुसीमा, आवेदन शुल्क, शैक्षणिक सुविधाओं और पंचायती राज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े कई मुद्दे उठाए। राजस्थान विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भाटी को शिव क्षेत्र से निर्दलीय विधायक के रूप में दर्ज किया गया है।

EWS पर भाटी का अभियान तेज, 26 सितंबर से यात्रा
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

भाटी का कहना है कि देश के अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक, कृषि और आर्थिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। ऐसे में EWS पात्रता तय करने के लिए एक समान संपत्ति मानदंड कई क्षेत्रों में व्यावहारिक दिक्कत पैदा कर सकते हैं। उन्होंने खास तौर पर जमीन के आकार के साथ उसकी उत्पादकता, सिंचाई सुविधा, स्थानीय बाजार मूल्य और उससे होने वाली वास्तविक आर्थिक उपयोगिता को भी आकलन में शामिल करने की मांग की।

राज्य और केंद्र के प्रमाण-पत्र में समानता की मांग

भाटी की प्रमुख मांगों में राज्यों द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सरकारी नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी मान्यता देना शामिल है। उनका तर्क है कि अभ्यर्थियों को राज्य और केंद्र के लिए अलग-अलग प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से राहत मिलनी चाहिए।

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उन्होंने EWS प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि बढ़ाने का भी सुझाव दिया। इसके अलावा निर्धारित शर्तों के तहत शपथ-पत्र के आधार पर नवीनीकरण की सुविधा देने की मांग रखी गई है।

आयुसीमा और आवेदन शुल्क में राहत

भाटी ने EWS अभ्यर्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकतम आयुसीमा और आवेदन शुल्क में उचित छूट देने की मांग की। जहां नियम लागू हों, वहां न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता से संबंधित राहत पर भी विचार करने की बात कही।

उन्होंने EWS आय निर्धारण की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी जोर दिया। खासकर विवाहित महिला अभ्यर्थियों को मायके और ससुराल से जुड़े दस्तावेज जुटाने में होने वाली परेशानियों का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट और आसान नियम बनाने की मांग की।

विद्यार्थियों के लिए सुविधाओं पर जोर

EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, छात्रावास और दूसरी शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। भाटी के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के लिए केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि आर्थिक एवं शैक्षणिक सहयोग की भी जरूरत है।

इसके साथ ही उन्होंने EWS से जुड़े नीतिगत और प्रशासनिक मामलों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर विचार करने की मांग रखी।

पंचायती राज में प्रतिनिधित्व का मुद्दा

भाटी ने पंचायती राज संस्थाओं में EWS वर्ग के लिए प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने की मांग भी सामने रखी। यह मुद्दा ऐसे समय उठाया गया है, जब राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों की तैयारी चल रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भाटी की प्रस्तावित यात्रा में EWS के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय भी प्रमुख रहेगा।

भाटी ने दावा किया कि राजस्थान के 75 से अधिक विधायक उनकी मांगों के समर्थन में लिखित सहमति या समर्थन पत्र दे चुके हैं। उन्होंने प्रदेश के सांसदों से भी संपर्क कर इस मुद्दे पर समर्थन मांगे जाने की बात कही।

बाड़मेर से शुरू होगा अभियान

इन मांगों को लेकर भाटी ने प्रदेशव्यापी यात्रा का ऐलान किया है। उपलब्ध रिपोर्टों में यात्रा की शुरुआत 25 सितंबर से बताए जाने की जानकारी है, जबकि आपके दिए प्रेस नोट में 26 सितंबर की तारीख दी गई है। यात्रा का केंद्र बाड़मेर का आलोक आश्रम रहेगा और अभियान के दौरान पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में EWS से जुड़े मुद्दों पर संवाद प्रस्तावित है।

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यात्रा के दौरान EWS पात्रता, प्रमाण-पत्र प्रक्रिया, आयुसीमा, शैक्षणिक सुविधाओं और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच उठाया जाएगा। भाटी का कहना है कि EWS व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अवसर उपलब्ध कराना है, इसलिए नियम बनाते समय अलग-अलग क्षेत्रों की वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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