भिवाड़ी में दवा गोदाम पर कार्रवाई, 5 दवाएं अवमानक
भिवाड़ी के बिना लाइसेंस दवा गोदाम से बरामद दवाओं की गुणवत्ता जांच में पांच नमूने अवमानक पाए गए हैं। कुल 18 सैंपल लिए गए थे, जिनमें 16 की रिपोर्ट मिल चुकी है। अब संबंधित कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में जांच होगी। अधिकारियों की टीमें उत्पादन रिकॉर्ड, कच्चा माल, गुणवत्ता परीक्षण, बैच और सप्लाई चेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेंगी।
- भिवाड़ी दवा गोदाम से मिले 18 सैंपल में 5 अवमानक।
- बिना लाइसेंस दवा गोदाम से करीब 4 करोड़ की सामग्री जब्त।
- 5 दवाएं अवमानक मिलने के बाद निर्माताओं की जांच तेज।
Action taken against a medicine warehouse in Bhiwadi : भिवाड़ी में बिना लाइसेंस चल रहे दवा गोदाम पर हुई कार्रवाई अब दवा निर्माताओं तक पहुंच गई है। गोदाम से जब्त दवाइयों के गुणवत्ता परीक्षण में पांच नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इसके बाद औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने संबंधित कंपनियों की विनिर्माण इकाइयों में विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी में गोपनीय सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी। मौके से लगभग 1,500 कार्टन दवाइयां और अन्य सामग्री जब्त की गई थी। जब्त सामान की अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ रुपये बताई गई है। न्यायालय के निर्देश के तहत पूरी सामग्री औषधि नियंत्रण अधिकारी की निगरानी में रखी गई है।
जब्त दवाओं में अलग-अलग कंपनियों के उत्पाद शामिल थे। इनके परीक्षण के लिए कुल 18 नमूने प्रयोगशाला भेजे गए थे। इनमें से 16 की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हो चुकी है, जबकि दो नमूनों की रिपोर्ट अभी बाकी है। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 11 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप मिले, जबकि पांच नमूने अवमानक घोषित किए गए।
अवमानक मिले नमूनों में सिप्रोफ्लॉक्सासिन टैबलेट्स बीपी 500 मिलीग्राम और टेपेंटाडोल टैबलेट्स 225 मिलीग्राम शामिल हैं। इसके अलावा डाइक्लोफेनाक और कैफीन के संयोजन वाली चकापेन एक्स्ट्रा के दो बैच तथा डाइक्लोफेनाक सोडियम 50 मिलीग्राम वाली मेडिकब-55 भी गुणवत्ता परीक्षण में अवमानक पाई गई है।
विभाग के अनुसार संबंधित दवाओं के निर्माता पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं। इनमें कैंडोर हेल्थकेयर, लालड़ू; ओपल हेल्थकेयर, करनाल; एलेक्सा फार्मास्यूटिकल्स, बद्दी और यूनिशार्प ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, लालड़ू शामिल हैं। इन सभी से संबंधित उत्पादन इकाइयों की जांच के लिए टीमों को भेजा गया है।
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जांच के दौरान केवल तैयार दवाओं की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि उनके निर्माण की पूरी प्रक्रिया को खंगाला जाएगा। अधिकारी संबंधित बैच के मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड, इस्तेमाल किए गए कच्चे माल, क्वालिटी कंट्रोल दस्तावेज और बैच निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेंगे। इसके साथ ही दवाओं के वितरण और सप्लाई चेन की भी जानकारी जुटाई जाएगी।
कार्रवाई के दौरान गोदाम से टेपेंटाडोल, प्रेगाबालिन और कोट्रिमोक्साजोल जैसे सक्रिय औषधीय घटक, पैकेजिंग सामग्री, पंचेज एंड डाइज और एक्सपायर्ड सिल्डेनाफिल टैबलेट्स भी मिली थीं। विभाग अब इन सभी पहलुओं को जांच के दायरे में रखते हुए आगे बढ़ रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि संबंधित दवाओं का निर्माण, गुणवत्ता परीक्षण, भंडारण और वितरण तय नियमों के मुताबिक हुआ था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में दवाओं की गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। बिना लाइसेंस दवा कारोबार और मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली दवाओं के मामलों में जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ नियमों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।



