पंचायत चुनाव में बीजेपी ढाई साल के विकास कार्यों के बूते मैदान में उतरेगी : बैरवा
राजस्थान के आगामी पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि भाजपा चुनाव में सरकार के ढाई साल के कामकाज और उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाएगी। उन्होंने नामांकन खारिज होने के आरोपों पर नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सभी प्रत्याशियों के फॉर्म की जांच समान प्रक्रिया के तहत की जाती है।
- पंचायत चुनाव में भाजपा ढाई साल के काम पर मांगेगी वोट
- प्रेमचंद बैरवा ने नामांकन खारिज होने के आरोपों पर दिया जवाब
- भाजपा सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को बनाया जाएगा मुद्दा
BJP to Seek Votes on 2.5-Year Work : राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सियासी हलचल बढ़ती जा रही है। नामांकन वापसी के अंतिम दौर के बीच कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने भाजपा का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में नामांकन पत्रों की जांच निर्धारित नियमों और दस्तावेजों के आधार पर होती है। किसी फॉर्म में खामी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
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कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से दबाव बनाकर उसके प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त करवाए जा रहे हैं। बैरवा ने इन आरोपों को लेकर कहा कि नामांकन की जांच के दौरान प्रत्याशी की पार्टी नहीं, बल्कि दस्तावेज और नियम देखे जाते हैं। उनके मुताबिक भाजपा, कांग्रेस या किसी अन्य दल के प्रत्याशी के लिए प्रक्रिया एक जैसी है।
ढाई साल के काम पर चुनाव लड़ने का दावा
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा आगामी पंचायत चुनाव में प्रदेश सरकार के पिछले ढाई साल के कामकाज को आधार बनाकर जनता के बीच जाएगी। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों और समाज के विभिन्न वर्गों के लिए योजनाएं शुरू की हैं।
बैरवा ने कहा कि युवा, महिलाएं, किसान और मजदूर सहित कई वर्गों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल वादे करने के बजाय उन्हें पूरा करने पर भरोसा करती है और सरकार ने अपने कार्यकाल में कई विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है।
भाजपा में मतभेद बातचीत से दूर करने की बात
पंचायत चुनाव में संगठन की स्थिति पर भी बैरवा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सभी स्थानों पर एकजुट होकर चुनाव लड़ने की कोशिश कर रही है। जहां स्थानीय स्तर पर किसी तरह का मतभेद सामने आएगा, वहां बातचीत के जरिए उसे सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
उनका कहना है कि चुनाव के दौरान पार्टी की प्राथमिकता संगठन को मजबूत रखते हुए प्रत्याशियों के साथ समन्वय बनाकर आगे बढ़ना है।
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स्कूलों की बदहाली पर भी सरकार का बचाव
प्रदेश के जर्जर और खराब स्थिति वाले सरकारी स्कूलों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी उपमुख्यमंत्री ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पुराने और समस्याग्रस्त स्कूल भवनों की पहचान पहले से की जा रही थी। जहां भवन की स्थिति ठीक नहीं थी, वहां जरूरत के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए पढ़ाई जारी रखने के प्रयास किए गए।
बैरवा ने कहा कि प्रदेश में कई स्कूल लंबे समय से पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं। इसलिए उनकी मौजूदा स्थिति के लिए केवल वर्तमान सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
जर्जर स्कूलों के लिए बजट से सुधार की तैयारी
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर उनके सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री की ओर से आवश्यक बजट उपलब्ध कराया गया है और आने वाले समय में जर्जर स्कूल भवनों में सुधार कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिले। इसके लिए स्कूल भवनों की स्थिति सुधारने के साथ जरूरी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
चुनाव में काम बनाम आरोपों की सियासत
पंचायत चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता दिखाई दे रहा है। एक तरफ कांग्रेस नामांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा सरकार के कामकाज को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
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बैरवा के बयान से साफ है कि भाजपा आगामी पंचायत चुनाव में अपने ढाई साल के कार्यकाल को प्रमुख आधार बनाकर जनता के बीच जाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।



