‘खबरों के इर्द-गिर्द’ का लोकार्पण, तीन दशक के जनसम्पर्क अनुभव अब किताब में
जयपुर में आयोजित जनसम्पर्क मित्र समूह के मासिक स्नेह मिलन कार्यक्रम में पूर्व संयुक्त निदेशक एवं व्यंग्यकार प्रभात गोस्वामी की पुस्तक 'खबरों के इर्द-गिर्द : जनसम्पर्क सेवा के तीन दशक' का लोकार्पण किया गया। वक्ताओं ने इसे जनसम्पर्क, प्रशासन और पत्रकारिता के अनुभवों को समेटने वाला उपयोगी दस्तावेज बताते हुए नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी कृति बताया।
- ‘खबरों के इर्द-गिर्द’ पुस्तक का जयपुर में लोकार्पण किया गया।
- प्रभात गोस्वामी ने जनसम्पर्क सेवा के तीन दशक के अनुभव साझा किए।
- ‘खबरों के इर्द-गिर्द’ को जनसम्पर्क और पत्रकारिता का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया गया।
Three decades of public relations experience now in a book : जनसम्पर्क मित्र समूह के मासिक स्नेह मिलन कार्यक्रम में सोमवार को पूर्व संयुक्त निदेशक एवं व्यंग्यकार प्रभात गोस्वामी की नई पुस्तक ‘खबरों के इर्द-गिर्द : जनसम्पर्क सेवा के तीन दशक’ का लोकार्पण किया गया। नारायण सर्किल स्थित श्री दिगम्बर जैन भट्टारक जी नसियां परिसर में आयोजित समारोह में जनसम्पर्क विभाग से जुड़े अधिकारियों और साहित्य प्रेमियों ने पुस्तक का विमोचन किया।
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पुस्तक में लेखक ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग और सहकारी डेयरी में तीन दशक के सेवाकाल के दौरान मिले अनुभवों, प्रशासनिक कार्यशैली, पत्रकारिता से जुड़े प्रसंगों और विभिन्न जिम्मेदारियों के दौरान मिले खट्टे-मीठे संस्मरणों को सहज भाषा में प्रस्तुत किया है। इसमें दो मुख्यमंत्रियों सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कार्य करने के अनुभव भी शामिल हैं।
पूर्व अतिरिक्त निदेशक एवं साहित्यकार गोपाल शर्मा ने कहा कि सरकारी सेवा के साथ साहित्य और रचनात्मक लेखन को निरंतर आगे बढ़ाना आसान नहीं होता, लेकिन प्रभात गोस्वामी ने दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक जनसम्पर्क से जुड़े लोगों के साथ-साथ साहित्य प्रेमियों के लिए भी उपयोगी साबित होगी।
पूर्व संयुक्त निदेशक और रंगकर्मी ईश्वर दत्त माथुर ने कहा कि अपने सेवाकाल के अनुभवों को पुस्तक के रूप में संजोना एक सराहनीय प्रयास है। उनका मानना है कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ी के लिए जनसम्पर्क और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
लेखक प्रभात गोस्वामी ने भी कार्यक्रम में पुस्तक की पृष्ठभूमि बताते हुए कई रोचक संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि पुस्तक में जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के प्रशासनिक अनुभवों और जनसम्पर्क सेवा के अनेक पहलुओं को समाहित करने का प्रयास किया गया है।
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कार्यक्रम में पूर्व उप निदेशक डॉ. लीलाधर उच्चैनिया ने पुस्तक पर विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इंडिया नेटबुक्स, नोएडा से प्रकाशित 176 पृष्ठों की यह कृति केवल संस्मरण संग्रह नहीं, बल्कि जनसम्पर्क विभाग, प्रशासनिक व्यवस्था और पत्रकारिता की कार्यशैली को समझने वाला एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है। समारोह में वरिष्ठ जनसम्पर्ककर्मी रवि गोस्वामी, यादवेन्द्र सेन, कन्हैया लाल मीणा, रेणु जुनेजा और राजेन्द्र शर्मा ‘राजू’ सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन गोविंद शर्मा ने किया।



