जल जीवन मिशन पर मुख्य सचिव सख्त, समय पर पूरी हों सभी योजनाएं

राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सभी योजनाएं तय समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने सुजलम भारत आईडी, हर घर जल प्रमाणीकरण, जल अर्पण कार्यक्रम और वित्तीय समापन जैसे लंबित कार्यों में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया।

  • जल जीवन मिशन की सभी योजनाएं समय पर पूरी करने के निर्देश।
  • सुजलम भारत आईडी और हर घर जल प्रमाणीकरण अभियान तेज करने पर जोर।
  • जल अर्पण कार्यक्रम के जरिए 2500 पेयजल योजनाएं ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएंगी।

Chief Secretary Reviews Jal Jeevan Mission Progress: जयपुर। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मिशन की सभी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए और कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

बैठक में मुख्य सचिव ने सुजलम भारत आईडी, हर घर जल रिपोर्टिंग एवं प्रमाणीकरण, जल सेवा आकलन और भौतिक रूप से पूर्ण परियोजनाओं के वित्तीय समापन में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने 10 जुलाई को नई दिल्ली में राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के साथ हुई समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि राज्य एपेक्स कमेटी के माध्यम से सभी लंबित प्रस्ताव तय समय में केंद्र सरकार को भेजे जाएं, ताकि मिशन की समयसीमा के भीतर सभी परियोजनाएं पूरी हो सकें।

समीक्षा बैठक में बताया गया कि राजस्थान में जल जीवन मिशन के तहत करीब 1,00,145 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत हैं। वर्ष 2019 में जहां ग्रामीण क्षेत्रों के केवल 11 प्रतिशत परिवारों के पास नल से जल की सुविधा थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 63.61 लाख परिवारों (करीब 59 प्रतिशत) तक पहुंच गया है। मिशन के तहत अब तक 51.87 लाख घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। साथ ही 12,095 गांवों को ‘हर घर जल’ घोषित किया गया है, जबकि 6,138 गांवों का प्रमाणीकरण भी पूरा हो चुका है।

बैठक में जल अर्पण कार्यक्रम की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि भौतिक रूप से पूरी हो चुकी करीब 2,500 पेयजल योजनाओं को विशेष कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों को औपचारिक रूप से सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि इस दौरान जनभागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति स्थानीय स्वामित्व विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

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उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पूर्ण हो चुकी योजनाओं का वित्तीय समापन भी जल्द किया जाए। इसके लिए माप पुस्तिकाएं, एज-बिल्ट ड्रॉइंग, अंतिम बिल और भुगतान जैसी सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी कर योजनाओं को आईएमआईएस पोर्टल पर बंद किया जाए।

मुख्य सचिव ने केंद्रांश प्रतिपूर्ति, लंबित मामलों के निस्तारण और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि लंबित प्रतिपूर्ति दावों का शीघ्र समाधान किया जाए और उपलब्ध बजट का समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

बैठक के दौरान ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव में पंचायती राज विभाग की भूमिका पर भी जोर दिया गया। उन्होंने नल जल मित्रों और आरपीएल कर्मियों के नामांकन एवं प्रशिक्षण की प्रक्रिया तेज करने, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को मजबूत बनाने तथा संशोधित संचालन एवं रखरखाव (O&M) नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की नियमित बैठकें आयोजित करने और हर घर जल प्रमाणीकरण, सुजलम भारत आईडी तथा जल अर्पण कार्यक्रम की प्रगति की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश भी दिए।

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