रक्षाबंधन पर CM भजनलाल की खास अपील
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रक्षाबंधन और संस्कृत दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और भारतीय संस्कृति से जुड़ा पर्व बताया। साथ ही संस्कृत की प्राचीन विरासत और उसके ज्ञान-विज्ञान में योगदान को रेखांकित करते हुए नई पीढ़ी से भाषा के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
- रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
- संस्कृत दिवस पर नई पीढ़ी से संस्कृत के संवर्धन की अपील की।
CM Bhajanlal’s special appeal on Raksha Bandhan : रक्षाबंधन और संस्कृत दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने दोनों पर्वों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान की समृद्ध विरासत से जोड़ते हुए इनके महत्व पर प्रकाश डाला।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के बीच स्नेह का त्योहार नहीं है, बल्कि यह विश्वास और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का भी प्रतीक है। भारतीय परंपरा में रिश्तों को विशेष महत्व दिया गया है और उन्हें मन, वचन तथा कर्म से निभाने की सीख इस पर्व के माध्यम से मिलती है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से रक्षाबंधन को आपसी प्रेम, सम्मान और सद्भाव के साथ मनाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे पर्व समाज में रिश्तों की गर्माहट और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने का काम करते हैं।
इसी अवसर पर श्रावण पूर्णिमा को मनाए जाने वाले संस्कृत दिवस की भी उन्होंने शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने संस्कृत को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भाषा बताते हुए कहा कि इसका योगदान केवल धर्म और दर्शन तक सीमित नहीं रहा है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत में चिकित्सा, योग, संगीत और साहित्य सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा व्यापक ज्ञान संरक्षित रहा है। यही वजह है कि यह भाषा भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है और आज भी इसके अध्ययन एवं संरक्षण की आवश्यकता बनी हुई है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विशेष रूप से युवाओं और नई पीढ़ी से संस्कृत के प्रति रुचि विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में अपनी भूमिका निभाएं, ताकि देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंच सके।
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रक्षाबंधन के स्नेह और संस्कृत दिवस की ज्ञान परंपरा को जोड़ते हुए मुख्यमंत्री का संदेश भारतीय संस्कृति और विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने पर केंद्रित रहा।



